ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद या केवल रणनीतिक ठहराव

अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से जारी भीषण सैन्य संघर्ष पर फिलहाल 14 दिनों के लिए विराम लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले हमलों और बमबारी को टालने की घोषणा की है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब ट्रंप ने ईरान को पूरी तरह तबाह करने की चेतावनी देते हुए रात 8 बजे तक की समय सीमा तय की थी। इस युद्धविराम के पीछे कूटनीतिक दबाव और सामरिक मजबूरियां दोनों ही प्रमुख कारक बनकर उभरी हैं।
युद्धविराम की मुख्य शर्तें और रणनीतिक कारण
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह दो हफ्ते का समझौता एक विशेष शर्त पर टिका है। ईरान को वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलना होगा। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने अपने सैन्य लक्ष्यों को लगभग पूरा कर लिया है, इसलिए अब एक स्थायी शांति समझौते की दिशा में बढ़ने का यह सही समय है।
इस शांति वार्ता के पीछे पाकिस्तान और चीन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है:
- पाकिस्तान की मध्यस्थता: ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर साझा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अनुरोध पर उन्होंने विनाशकारी हमलों को रोकने का फैसला किया।
- चीन का कूटनीतिक प्रभाव: अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया कि चीन ने ईरान को इस युद्धविराम के लिए राजी करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
- इस्लामाबाद वार्ता: पाकिस्तान ने 10 अप्रैल को दोनों देशों के प्रतिनिधियों को आमने-सामने की बातचीत के लिए आमंत्रित किया है ताकि विवादों का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
ईरान का 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव
सीजफायर को अंतिम रूप देने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने एक व्यापक प्रस्ताव रखा है, जिसे ट्रंप ने बातचीत का व्यावहारिक आधार माना है। इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- अमेरिका द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों का पूर्ण अंत।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का संप्रभु नियंत्रण बरकरार रहना।
- ईरान को यूरेनियम संवर्धन की मंजूरी दी जाए।
- ईरान पर लगे सभी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को हटाना।
- विदेशी बैंकों में जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को तत्काल रिलीज करना।
- क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर रोक।
- युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए ईरान को पूर्ण भुगतान।
इजराइल का रुख और जमीनी हकीकत
व्हाइट हाउस के अनुसार, इजराइल भी इस युद्धविराम प्रक्रिया का हिस्सा है। इजराइल ने बातचीत के दौरान बमबारी रोकने पर सहमति तो जताई है, लेकिन जमीनी हालात थोड़े अलग नजर आ रहे हैं। ‘द टाइम्स ऑफ इजराइल’ की रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम की घोषणा के बावजूद इजराइली वायुसेना ईरान में अपने लक्षित हमले जारी रखे हुए है, जिससे इस शांति समझौते की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आर्थिक प्रभाव
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का दावा है कि अमेरिका ने उनके 10 सूत्रीय प्लान को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसका सीधा अर्थ है कि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाने वाला ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जल्द ही खुल सकता है। हालांकि, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की योजना बना रहा है, जो भविष्य में एक नया विवाद बन सकता है।
एक झलक में
- अवधि: अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों का युद्धविराम घोषित।
- मध्यस्थ: पाकिस्तान और चीन ने सीजफायर कराने में मुख्य भूमिका निभाई।
- प्रमुख शर्त: ईरान को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ खोलना होगा।
- बैठक: 10 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच निर्णायक वार्ता होगी।
- इजराइल की स्थिति: आधिकारिक तौर पर सीजफायर का हिस्सा, लेकिन ईरान में सैन्य अभियान अब भी जारी।
- ईरान की मांग: प्रतिबंधों को हटाने और यूरेनियम संवर्धन की अनुमति पर ईरान अडिग।