प्रियंका गांधी ने ईरान के साहस को सराहा और पश्चिमी देशों की नैतिकता पर उठाए गंभीर सवाल

प्रियंका गांधी ने ईरान के साहस को सराहा और पश्चिमी देशों की नैतिकता पर उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान के प्रति अपना समर्थन जताते हुए पश्चिमी देशों के रवैये की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने ईरानी नागरिकों द्वारा अपने देश के संसाधनों की रक्षा के लिए दिखाए गए साहस को एक बड़ी मिसाल बताया। प्रियंका गांधी का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर था और युद्ध जैसी स्थितियां बनी हुई थीं।

मानवीय ढाल बनकर खड़े हुए ईरानी नागरिक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के पावर प्लांट, पुल और बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी दिए जाने के बाद ईरान की जनता सड़कों पर उतर आई। ट्रंप ने बातचीत के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की थी, जिसके खत्म होने के बाद हमले की चेतावनी दी गई थी। इस खतरे को देखते हुए ईरानी पुरुषों और महिलाओं ने एकजुटता दिखाई और अपने देश के महत्वपूर्ण पावर प्लांट्स और बुनियादी ढांचों के चारों ओर मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाई। अहवाज के व्हाइट ब्रिज और विभिन्न ऊर्जा केंद्रों पर लोगों का यह जमावड़ा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा।

पश्चिमी देशों की भाषा और नैतिकता पर प्रहार

प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पश्चिमी शक्तियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ पश्चिमी देश एक पूरी सभ्यता को खत्म करने की बात कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ ईरान के आम लोग अपने देश को बचाने के लिए निहत्थे खड़े थे। उनके अनुसार, अब दुनिया देख रही है कि पश्चिम की तथाकथित नैतिकता का मुखौटा उतर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नफरत, गुस्सा और अन्याय कभी स्थायी जीत हासिल नहीं कर सकते, अंत में जीत साहस की ही होती है।

राहुल गांधी ने परमाणु खतरे को बताया अस्वीकार्य

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी डोनाल्ड ट्रंप की धमकी की निंदा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में किसी सभ्यता के अंत की कल्पना करना या ऐसी भाषा का प्रयोग करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। राहुल गांधी ने परमाणु हथियारों के प्रयोग की संभावना को मानवता के लिए खतरा बताते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।

दो सप्ताह का संघर्षविराम और क्षेत्रीय शांति

राहत की बात यह रही कि हमले के लिए तय की गई समय सीमा समाप्त होने से कुछ देर पहले राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ दो सप्ताह के सीजफायर (संघर्षविराम) पर सहमत हो गए। इस फैसले से न केवल ईरान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध का खतरा फिलहाल टल गया है। इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह दो सप्ताह की शांति इस क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

एक झलक

  • ईरानी नागरिकों ने पावर प्लांट्स को बचाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई।
  • प्रियंका गांधी ने ईरान के साहस की सराहना करते हुए पश्चिम की आलोचना की।
  • डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बुनियादी ढांचे को तबाह करने की धमकी दी थी।
  • राहुल गांधी ने सभ्यता को खत्म करने वाली भाषा को अस्वीकार्य करार दिया।
  • अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर सहमति बनी।

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