केरल चुनाव 2026 में दागी उम्मीदवारों की भरमार ने बढ़ाई राज्य की सियासी हलचल

केरल चुनाव 2026 में दागी उम्मीदवारों की भरमार ने बढ़ाई राज्य की सियासी हलचल

केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे राज्य का सियासी पारा बढ़ता जा रहा है। इसी बीच एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और केरल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि स्वच्छता की राजनीति के दावों के बावजूद चुनावी मैदान में दागी उम्मीदवारों का दबदबा बना हुआ है।

चुनावी आंकड़ों में आपराधिक छवि का विश्लेषण

एडीआर ने केरल विधानसभा चुनाव में उतरने वाले 883 उम्मीदवारों में से 863 के हलफनामों का गहन विश्लेषण किया है। इस रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि कुल उम्मीदवारों में से 324 यानी लगभग 38% उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की पुष्टि की है। इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि इनमें से 201 उम्मीदवारों पर हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं।

राजनीतिक दलों की स्थिति और रेड अलर्ट निर्वाचन क्षेत्र

अपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारने के मामले में किसी एक दल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। आंकड़ों के अनुसार:

  • कांग्रेस के 85 उम्मीदवारों में से 72 दागी हैं।
  • भाजपा के 93 उम्मीदवारों में से 59 पर केस दर्ज हैं।
  • सीपीएम के 77 उम्मीदवारों में से 51 ने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी दी है।

इतना ही नहीं, केरल की 140 विधानसभा सीटों में से 59 सीटों को ‘रेड अलर्ट’ निर्वाचन क्षेत्र घोषित किया गया है। यह वे क्षेत्र हैं जहां तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों का आपराधिक इतिहास है, जो मतदाताओं के सामने विकल्पों की कमी और राजनीतिक दलों की मजबूरी या रणनीति को दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजनीति में पारदर्शिता लाने और उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के कड़े निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई बड़ा सुधार नहीं देखा गया है। राजनीतिक दल आज भी उम्मीदवारों की ‘जीतने की क्षमता’ (Winnability) को उनकी साफ-सुथरी छवि से ऊपर प्राथमिकता दे रहे हैं। वर्तमान विधानसभा की स्थिति और भी गंभीर है, जहां करीब 70% मौजूदा विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

चुनाव और परिणाम की महत्वपूर्ण तिथियां

केरल की जनता 9 अप्रैल को अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी, जबकि चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस रिपोर्ट के आने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जागरूक मतदाता उम्मीदवारों की छवि को आधार बनाकर अपना वोट देंगे या फिर पारंपरिक पार्टी निष्ठा ही सर्वोपरि रहेगी।

एक झलक

  • कुल उम्मीदवार: 883 (विश्लेषण 863 का हुआ)
  • आपराधिक केस वाले उम्मीदवार: 324 (38%)
  • गंभीर आरोपों वाले उम्मीदवार: 201 (23%)
  • रेड अलर्ट सीटें: 59 (42%)
  • मौजूदा विधायकों का रिकॉर्ड: 70% विधायक दागी
  • मतदान की तिथि: 9 अप्रैल 2026
  • मतगणना की तिथि: 4 मई 2026

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