होर्मुज जलडमरूमध्य तो खुला, लेकिन अब देना होगा ‘टैक्स’! ईरान की नई चाल से दुनिया हैरान

अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिनों के भीषण तनाव के बाद आखिरकार 14 दिनों के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। बुधवार को हुई इस घोषणा के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन एक चौंकाने वाली खबर यह है कि ईरान अब इस 34 किलोमीटर लंबे जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर ‘ट्रांजिट शुल्क’ या ‘टोल’ वसूलने की योजना बना रहा है। अब तक इस रास्ते से गुजरने के लिए किसी भी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ता था।

रॉयटर्स और एपी की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के कारण ईरान को हुए आर्थिक और प्रशासनिक नुकसान की भरपाई के लिए तेहरान प्रशासन ने यह कदम उठाने का मन बनाया है। पड़ोसी देश ओमान भी इस फैसले में ईरान के साथ खड़ा दिख रहा है। ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम घारीबाबादी ने संकेत दिए हैं कि वे ओमान के साथ मिलकर एक नया प्रोटोकॉल तैयार कर रहे हैं, जिसमें जहाजों के आकार और उनमें लदे सामान के आधार पर फीस तय की जाएगी। संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों ने इस योजना का कड़ा विरोध करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अनावश्यक बोझ बताया है।

संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत, कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से सीधा टैक्स नहीं वसूल सकता, हालांकि वे कुछ सीमित सेवाओं के लिए फीस ले सकते हैं। यदि ईरान अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो कच्चे तेल का परिवहन खर्च बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। युद्ध रुकने के बावजूद, ‘टोल टैक्स’ का यह नया जिन्न वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों को एक बार फिर आसमान पर पहुंचा सकता है।

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