भारतीय सेना अगले युद्ध को जीतने के लिए पूरी तरह तैयार

पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) जेजे सिंह ने भारतीय सेना की भविष्य की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक बयान दिया है। उनके अनुसार, भारतीय सेना केवल रक्षात्मक मुद्रा में नहीं है, बल्कि वह अगला युद्ध लड़ने और उसमें निर्णायक जीत हासिल करने के लिए खुद को आधुनिक बना रही है। यह तैयारी पारंपरिक सीमाओं से परे जाकर भविष्य की आधुनिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर की जा रही है।
बहुआयामी युद्ध कौशल पर जोर
जनरल जेजे सिंह ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं या जमीन तक सीमित नहीं रहेंगे। अब युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है और सेना को कई मोर्चों पर एक साथ सक्षम होना होगा। उन्होंने युद्ध के उन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है जहां भारत अपनी ताकत बढ़ा रहा है:
- जमीन, वायु और समुद्र: पारंपरिक क्षेत्रों में श्रेष्ठता बनाए रखना।
- अंतरिक्ष (Space Domain): भविष्य के युद्ध की शुरुआत अंतरिक्ष से होने की संभावना है, इसलिए भारत अपने अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है।
- साइबर क्षेत्र: डिजिटल खतरों से निपटने और तकनीकी सुरक्षा को अभेद्य बनाने पर ध्यान।
- संज्ञानात्मक डोमेन (Cognitive Domain): बौद्धिक कौशल और सूचना युद्ध के क्षेत्र में बढ़त बनाना।
रणनीतिक चुनौतियों का विश्लेषण
रक्षा विशेषज्ञों के लेखों के एक संकलन के विमोचन के अवसर पर पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल और पड़ोसी देशों से मिलने वाली चुनौतियों को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के हर आयाम पर काम करना अनिवार्य है। इसमें न केवल सैन्य शक्ति, बल्कि आर्थिक स्थिरता और तकनीकी उन्नति भी शामिल है। भारतीय सेना इन सभी पहलुओं को अपनी युद्ध नीति का हिस्सा बना रही है ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
दूरदर्शिता और क्षमता निर्माण
यह केवल तात्कालिक खतरों का जवाब देने के बारे में नहीं है, बल्कि आने वाली चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाने के बारे में भी है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज पांडे ने भी पूर्व में इसी बात पर जोर दिया था कि सेना को अपनी क्षमताओं को इस तरह विकसित करना चाहिए कि वे भविष्य के युद्धों के अनुकूल हों। भारत का ध्यान वर्तमान में एक ऐसी एकीकृत युद्ध प्रणाली विकसित करने पर है जो अंतरिक्ष से लेकर जमीनी मोर्चे तक निर्बाध रूप से कार्य कर सके।
एक झलक में मुख्य बिंदु
- भारतीय सेना भविष्य के युद्ध लड़ने और जीतने की रणनीति पर काम कर रही है।
- भविष्य का युद्ध जमीन, हवा और समुद्र के साथ अंतरिक्ष और साइबर डोमेन में लड़ा जाएगा।
- देश अपने अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे (Space Infrastructure) को दुरुस्त करने की प्रक्रिया में जुटा है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सैन्य क्षमता के साथ-साथ आर्थिक और बौद्धिक कौशल को भी मजबूत किया जा रहा है।
- सेना का लक्ष्य आने वाली चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाकर अपनी मारक क्षमता बढ़ाना है।