थानों में सीसीटीवी लगाने पर केंद्र का बड़ा आश्वासन दो हफ्तों में दूर होंगी सभी तकनीकी बाधाएं

देशभर के पुलिस थानों में पारदर्शिता और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से जुड़ी सभी मौजूदा समस्याओं और तकनीकी अड़चनों को अगले दो सप्ताह के भीतर सुलझा लिया जाएगा।
अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ को सूचित किया कि वह स्वयं इस परियोजना की समीक्षा कर रहे हैं। इस आश्वासन के बाद न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय से इस लंबित मामले में तेजी आने की उम्मीद है।
केरल मॉडल और एक समान दिशा-निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के बीच तकनीकी असमानता पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान गाइडलाइन जारी करे।
- सफल सॉफ्टवेयर: कोर्ट ने केरल के ‘केरलम’ सॉफ्टवेयर और उसके सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड की विशेष रूप से सराहना की।
- संसाधनों की बचत: पीठ ने तर्क दिया कि जब एक सफल मॉडल पहले से मौजूद है, तो अन्य राज्यों को अलग से धन और समय बर्बाद करने की आवश्यकता नहीं है।
- अनुसरण: मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों को भी इसी तरह के सफल सिस्टम को अपनाने का सुझाव दिया गया है।
मानवाधिकारों की सुरक्षा और अनिवार्य मानक
यह मामला केवल कैमरे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिरासत में होने वाली हिंसा को रोकने और जवाबदेही तय करने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के अपने ऐतिहासिक निर्देशों को दोहराते हुए कुछ कड़े मानक तय किए हैं:
- नाइट विजन और ऑडियो: सभी सीसीटीवी कैमरों में नाइट विजन और ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा अनिवार्य है।
- व्यापक कवरेज: कैमरे थाने के प्रवेश-निकास द्वार, लॉक-अप, कॉरिडोर, रिसेप्शन और हर उस कोने में होने चाहिए जहां पूछताछ या आवाजाही होती है।
- डेटा बैकअप: फुटेज का बैकअप कम से कम एक वर्ष तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
- जांच एजेंसियां: यह नियम केवल पुलिस थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीबीआई, ईडी और एनआईए जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के कार्यालयों पर भी लागू होता है।
आगे की राह और स्टेटस रिपोर्ट
अटार्नी जनरल के आश्वासन के बाद कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को भविष्य की व्यक्तिगत पेशी से फिलहाल छूट दे दी है। हालांकि, न्यायमित्र सिद्धार्थ दवे को 28 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई तक ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इस समय सीमा के भीतर केंद्र के ठोस कदमों से यह स्पष्ट होगा कि देश की पुलिस व्यवस्था में डिजिटल पारदर्शिता कितनी जल्दी प्रभावी हो पाती है।
एक झलक में
- केंद्र सरकार को थानों में सीसीटीवी संबंधी बाधाएं दूर करने के लिए दो हफ्ते का समय मिला।
- सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सीसीटीवी सॉफ्टवेयर और सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड मॉडल की तारीफ की।
- नाइट विजन, ऑडियो रिकॉर्डिंग और एक साल का फुटेज बैकअप रखना अनिवार्य होगा।
- केंद्रीय जांच एजेंसियों (सीबीआई, ईडी, एनआईए) के दफ्तरों में भी लगेंगे कैमरे।
- मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी, जिसमें ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाएगी।