मनीषियों के अपमान पर संग्राम! ममता के प्रहार पर बीजेपी का पलटवार, कहा- २६ में होगा टीएमसी का विसर्जन

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी “सस्ती राजनीति” के लिए बंगाल के मनीषियों का अपमान कर रहे हैं और उनके नाम को विकृत कर रहे हैं।
ममता का तीखा प्रहार: ममता बनर्जी ने अपने एक्स (ट्विटर) पोस्ट में लिखा, “मनीषियों का दुरुपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। बंकिम चंद्र जैसे बंगाल के महान नायकों के नाम भी बिगाड़े जा रहे हैं। जिन्हें बंगाल के इतिहास का ज्ञान नहीं है, वही ऐसी धृष्टता दिखा सकते हैं।” मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो लोग बंगाल की परंपरा और विरासत का अपमान करने का दुस्साहस करेंगे, उन्हें बंगाल की जनता करारा जवाब देगी।
विवाद की जड़: ‘बंकिम दा’ संबोधन: दरअसल, यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान से जुड़ा है, जो उन्होंने ८ दिसंबर को संसद में दिया था। पीएम मोदी ने ‘वंदे मातरम’ के रचयिता को ‘बंकिम दा’ कहकर संबोधित किया था। उन्होंने कहा था, “बंकिम दा ने जब वंदे मातरम लिखा, तब अंग्रेज समझ गए थे कि उनका टिकना मुश्किल है।” तृणमूल कांग्रेस ने इसे बंगाली भावनाओं का अपमान बताते हुए संसद में ही कड़ी आपत्ति जताई थी। सौगत राय ने उस वक्त पीएम को टोकते हुए उनकी गलती सुधारी थी। अब ममता ने उसी मुद्दे को फिर से हवा दी है।
बीजेपी का करारा जवाब: ममता के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि बंगाल के लोग अब इन बातों में रुचि नहीं रखते। उन्होंने कहा, “पिछले डेढ़ दशक में बंगाल का नुकसान करने वालों को जनता पहचान चुकी है। २६ का चुनाव तृणमूल का विसर्जन होगा।” बीजेपी का कहना है कि वे बंगाल की अस्मिता के असली संरक्षक हैं। चुनाव से पहले महापुरुषों की विरासत को लेकर शुरू हुआ यह राजनीतिक दंगल अब और भी गंभीर होता जा रहा है।