डूरंड लाइन पर फिर छिड़ा विवाद! चीन की ६ दिनों की कोशिशें नाकाम, तालिबान और पाक में बढ़ी तल्खी

अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का दावा करने वाले पाकिस्तान को अपने ही पड़ोसी अफगानिस्तान के साथ शांति स्थापित करने में मुंह की खानी पड़ी है। मंगलवार को चीन में तालिबान और पाकिस्तान के बीच हुई छह दिवसीय मैराथन बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। इस बैठक में तालिबान के कड़े सवालों ने पाकिस्तान की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
आतंकवाद की परिभाषा पर घिर गया पाक: बीबीसी पश्तो के अनुसार, बैठक के दौरान तालिबान ने पाकिस्तान से ‘आतंकवाद’ की परिभाषा स्पष्ट करने को कहा। तालिबान ने साफ कर दिया कि वे डूरंड लाइन (अफगान-पाक सीमा) को मान्यता नहीं देते हैं। तालिबान का कहना है कि अस्थायी युद्धविराम के बावजूद पाकिस्तानी सेना उनके इलाकों पर हमले कर रही है। तालिबान ने पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं के लिए अफगानिस्तान को दोष देना बंद करे।
टीटीपी और डूरंड लाइन का विवाद: रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने दावा किया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकी काबुल में शरण लिए हुए हैं। तालिबान ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताया। अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने कहा, “हम युद्ध समाप्त करना चाहते हैं, लेकिन अब सब कुछ पाकिस्तान के रवैये पर निर्भर करता है।”
मध्यस्थता की कोशिशें और विफलता: चीन के नेतृत्व में चल रही इस शांति वार्ता में तुर्की, यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे देश भी शामिल हैं। पाकिस्तान की शर्त है कि जब तक टीटीपी का सफाया नहीं होता, वे आगे नहीं बढ़ेंगे। वहीं तालिबान सीमा विवाद पर झुकने को तैयार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय जानकारों का कहना है कि जो देश खुद अपने पड़ोसी के साथ शांति समझौता नहीं कर पा रहा, उसका दूसरों के बीच मध्यस्थता करना केवल एक ढोंग है।