अमेरिका-ईरान में छिड़ा युद्धविराम! भारत की खुली किस्मत, निवेशकों ने कुछ ही घंटों में छापे १४ लाख करोड़

वैश्विक भू-राजनीति में एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने १४ दिनों के ऐतिहासिक युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता उस समय हुआ है जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव चरम पर था। दुनिया के कुल तेल और गैस आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में शांति का मतलब है वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नई संजीवनी।
युद्धविराम की घोषणा होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। तेल व्यापारियों और बीमा कंपनियों ने जो रिस्क प्रीमियम बढ़ा दिया था, अब उसमें कमी आने की उम्मीद है। हालांकि यह समझौता अभी केवल १४ दिनों के लिए है, लेकिन इसने बाजार को यह स्पष्ट संकेत दिया है कि तत्काल युद्ध का खतरा टल गया है।
भारत को क्या मिलेगा फायदा? भारत जैसे विकासशील देश के लिए अमेरिका-ईरान के बीच शांति किसी जैकपॉट से कम नहीं है। जैसे ही बाजार खुला, भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया। सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग ३.५% की तेजी आई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में १४ लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में स्थिरता का सीधा लाभ भारतीय उपभोक्ताओं को मिलता है।
महंगाई और सोने के भाव पर असर: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्धविराम स्थायी रूप में बदलता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम हो सकती हैं। ईंधन सस्ता होने से माल ढुलाई की लागत घटेगी, जिससे खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी। इसके अलावा, युद्ध की आशंका कम होने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घटेगी, जिससे सोने के भाव में गिरावट आने की संभावना है।
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोलने का फैसला किया है। गौर करने वाली बात यह है कि संघर्ष के दौरान भी ईरान ने भारत के प्रति अपनी कूटनीतिक मित्रता निभाते हुए भारतीय जहाजों के लिए रास्ता खुला रखा था। अब फंसे हुए अन्य जहाजों की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। तेल आयात बिल कम होने से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा और देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।