न्यूटाउन में 14 हजार मतुआ मतदाताओं के नाम कटने से भारी आक्रोश

कोलकाता के पास न्यूटाउन का मतुआ गढ़ इस समय गहरे डर और गुस्से की चपेट में है। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के कारण इस क्षेत्र के लगभग 14,000 मतुआ समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह घटनाक्रम आगामी 29 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
विश्वासघात और नागरिकता का संकट
साल 2020 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ज्योतिनगर निवासी नवीन विश्वास के घर दोपहर का भोजन किया था। उस समय उन्होंने आश्वासन दिया था कि भाजपा सरकार मतुआ समुदाय को नागरिकता सुनिश्चित करेगी। हालांकि, वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। जिन मतुआ परिवारों ने दशकों पहले विभाजन के दर्द को सहा और भारत में शरण ली, आज वे अपने ही देश में ‘बे-नागरिक’ होने के डर से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि डिटेंशन कैंप या देश निकाला जैसे खतरे अब उनके सिर पर मंडरा रहे हैं।
चुनावी समीकरणों पर प्रभाव
राजारहाट-न्यूटाउन विधानसभा क्षेत्र में मतुआ समुदाय की भूमिका निर्णायक होती है। आंकड़ों के अनुसार:
- इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 3,25,918 मतदाता हैं।
- इनमें से लगभग 40,000 मतदाता मतुआ समुदाय से संबंध रखते हैं।
- सुधांशु सरकार और गणेश मंडल जैसे हजारों लोगों के नाम एसआईआर के कारण सूची से बाहर हो गए हैं।
अखिल भारतीय मतुआ महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष नवीन विश्वास का कहना है कि मतुआ समुदाय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार मतुआ समाज ‘प्रतिशोध’ लेने के लिए वोट की कतार में खड़ा होगा।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। भाजपा उम्मीदवार पीयूष कनोड़िया का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद वे इन लोगों की नागरिकता वापस दिलाने का प्रयास करेंगे। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के तापस चटर्जी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब भाजपा की विभाजनकारी राजनीति का हिस्सा है, जिससे आम लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है।
परंपरागत रूप से भाजपा की ओर झुकाव रखने वाला यह समुदाय अब नागरिकता के सवाल पर कड़ा रुख अपनाने को तैयार दिख रहा है, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
एक झलक
- मुद्दा: न्यूटाउन में 14,000 मतुआ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
- कारण: चुनाव आयोग और केंद्र की एसआईआर (SIR) प्रक्रिया।
- समुदाय की प्रतिक्रिया: विश्वासघात का आरोप और मतदान के जरिए विरोध की तैयारी।
- ऐतिहासिक संदर्भ: 2020 में अमित शाह ने इसी क्षेत्र में नवीन विश्वास के घर भोजन कर नागरिकता का वादा किया था।
- राजनीतिक प्रभाव: 40,000 मतुआ वोटों के ध्रुवीकरण से राजारहाट-न्यूटाउन सीट पर कड़ा मुकाबला।