रूस यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर 32 भारतीयों की जान गई और कई अब भी फंसे

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष अब भारतीय परिवारों के लिए एक गहरे दर्द और चिंता का विषय बन गया है। पिछले चार वर्षों से अधिक समय से चल रहे इस युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए अब तक 32 भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है। यह मुद्दा न केवल मानवीय दृष्टिकोण से गंभीर है, बल्कि नई दिल्ली और मॉस्को के बीच कूटनीतिक संबंधों में भी तनाव पैदा कर रहा है।
मौत के आंकड़ों में भारी बढ़ोतरी
दिसंबर 2025 में आधिकारिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार मरने वाले भारतीयों की संख्या 26 थी, जो अब बढ़कर 32 हो गई है। इसी तरह लापता भारतीयों की संख्या भी 7 से बढ़कर 12 तक पहुंच गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि युद्ध के मैदान में स्थितियां कितनी भयावह हो चुकी हैं। हाल ही में जम्मू के सचिन खजूरिया, आरएस पुरा के मंजिंदर सिंह और हरियाणा के गीतिक शर्मा जैसे युवाओं के शव उनके पैतृक स्थानों पर पहुंचे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी रोष और दुख व्याप्त है।
कैसे बिछाया जा रहा है भर्ती का जाल
अधिकारियों और सूत्रों के अनुसार भारतीयों को रूसी सेना में शामिल करने के पीछे एजेंटों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। इसके लिए मुख्य रूप से तीन तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है:
- झूठे वादे: एजेंट भोले-भाले युवाओं को आकर्षक वेतन, भारी बोनस और रूस की नागरिकता दिलाने का प्रलोभन देते हैं।
- काम के बदले युद्ध: कई भारतीयों को प्लंबर, सफाईकर्मी और निर्माण श्रमिक के रूप में रूस ले जाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें लालच देकर या मजबूर करके रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती कर लिया गया।
- बढ़ती संख्या: वर्तमान में रूस में भारतीय श्रमिकों की संख्या लगभग 1 लाख तक पहुंच गई है, जिससे वे आसानी से इन एजेंटों के निशाने पर आ जाते हैं।
वापसी और रिहाई की कूटनीतिक कोशिशें
भारत सरकार अपने नागरिकों को इस संकट से निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल 214 भारतीयों के रूसी सेना में भर्ती होने की सूचना मिली है।
- सफल वापसी: नई दिल्ली और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के सक्रिय प्रयासों से 135 भारतीयों को सुरक्षित रिहा कराकर स्वदेश वापस लाया जा चुका है।
- मौजूदा स्थिति: वर्तमान में रूसी सेना में फंसे 35 अन्य भारतीयों की रिहाई के लिए सक्रिय रूप से काम किया जा रहा है ताकि उन्हें जल्द से जल्द मुक्त कराया जा सके।
प्रभाव और चुनौतियां
यह घटनाक्रम भारत की विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले युवाओं की सुरक्षा और उनके सत्यापन की प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मॉस्को के साथ मधुर संबंधों के बावजूद, रूसी सेना में भारतीयों की अनैच्छिक भर्ती एक ऐसा मुद्दा है जिसने दोनों देशों के बीच चर्चाओं को गरमा दिया है।
एक झलक
- कुल मौतें: 32 भारतीय नागरिक युद्ध में मारे गए।
- लापता: 12 भारतीय वर्तमान में लापता हैं।
- कुल भर्ती: 214 भारतीयों के रूसी सेना में शामिल होने की खबर।
- सुरक्षित वापसी: 135 भारतीय अब तक वापस लाए गए।
- शेष प्रयास: 35 भारतीयों की रिहाई के लिए कोशिशें जारी।
- कारण: एजेंटों द्वारा नौकरी और नागरिकता का झांसा देना।