91 लाख नाम गायब! भवानीपुर में नामांकन के बाद ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, दी खुली चुनौती

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आज भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। अलीपुर सर्वे सेटलमेंट कार्यालय में नामांकन जमा करने के बाद ममता बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए न केवल अपनी जीत का भरोसा जताया, बल्कि मतदाता सूची (SIR) में भारी गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला।
भवानीपुर से अटूट रिश्ता: नामांकन के बाद जनता का आभार व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “मैं साल के 365 दिन यहीं रहती हूँ। मेरा धर्म और कर्म, सब यहीं है। मैं यहीं की हूँ और यहीं रहूँगी।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘स्थानीय’ होने पर जोर देकर उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी को ‘बाहरी’ करार दिया है। दिलचस्प बात यह रही कि ममता ने बांग्ला के साथ-साथ गुजराती भाषा में भी वहां के मतदाताओं का अभिवादन किया। महुआ मोइत्रा विवाद के बीच ममता का गुजराती प्रेम एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वोटर लिस्ट विवाद और सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी: मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में लगभग 90.82 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “1 करोड़ 20 लाख नामों में से केवल 32 लाख नाम ही शामिल किए गए हैं, वह भी मेरे कानूनी संघर्ष के कारण। बाकी 58 लाख नामों का क्या हुआ? अगर कोई मर गया है या डुप्लीकेट है, तो उसे हटाना समझ आता है, लेकिन 27 लाख से अधिक जेन्युइन वोटरों को उनके अधिकार से वंचित क्यों किया जा रहा है?”
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को लेकर फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि जो लोग विचाराधीन हैं, वे असली मतदाता हैं। फिर उनके नाम क्यों फ्रीज किए गए? वे लोग वोट नहीं दे पाएंगे तो बाद में नाम जोड़ने का क्या मतलब? हम न्याय मांगेंगे।” मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में सबसे अधिक नाम काटे जाने पर उन्होंने चिंता जताई। दीदी ने साफ कर दिया है कि भवानीपुर की यह लड़ाई सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा की है।