ईरान-अमेरिका युद्धविराम से भारत को बड़ी राहत! कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, सस्ता होगा पेट्रोल?

पिछले कई हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के साथ-साथ भारतीय बाजार को भी सहमा दिया था। लेकिन ८ अप्रैल की सुबह एक राहत भरी खबर आई—दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी के लिए किसी ‘लाइफलाइन’ से कम नहीं है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर मंडराता खतरा टलने से वैश्विक सप्लाई चेन और ईंधन की कीमतों पर दबाव काफी कम हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और महंगाई से राहत: युद्धविराम का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड, जो १११ डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था, अब ९५ डॉलर के नीचे आ गया है। भारत के लिए यह बड़ी जीत है क्योंकि तेल सस्ता होने से माल ढुलाई की लागत घटती है, जिसका सीधा असर दाल-सब्जी और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों पर पड़ता है। इससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी और व्यापार संतुलन में सुधार होगा।
प्रवासी भारतीयों और रेमिटेंस पर असर: पश्चिम एशिया में लगभग ९० लाख भारतीय काम करते हैं। युद्ध की आहट से उनके परिवारों की नींद उड़ गई थी। युद्धविराम ने न केवल मानसिक शांति दी है, बल्कि आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। भारत को हर साल मिलने वाले १३५ बिलियन डॉलर के रेमिटेंस का ३८% हिस्सा इन्हीं खाड़ी देशों से आता है। अब पर्यटन और रोजगार के लिए यात्राएं भी फिर से सामान्य हो सकेंगी।
शेयर बाजार में रौनक, L&T के शेयरों ने भरी उड़ान: भारत के कुल व्यापार का लगभग १६ प्रतिशत हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होता है। युद्धविराम की खबर मिलते ही शेयर बाजार झूम उठा। बुनियादी ढांचा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला। कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार का ३०-३৫ प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों के प्रोजेक्ट्स से आता है। बुधवार को L&T का शेयर ८.০६% उछलकर ३,৯৮৬.১০ रुपये पर बंद हुआ।
चुनौतियां अभी बाकी हैं: राहत के बावजूद एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह केवल दो सप्ताह का ठहराव है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर बढ़ा हुआ टैरिफ और इंश्योरेंस प्रीमियम अभी भी सिरदर्द बना हुआ है। भारत के लिए असली जीत तभी होगी जब यह अस्थायी शांति एक स्थायी समझौते में बदल जाए।