“ईरान के साहस को सलाम!” युद्धविराम पर महबूबा मुफ्ती का बड़ा बयान, पाकिस्तान की भी जमकर की तारीफ!

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम ने पूरी दुनिया को राहत दी है। इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर जम्मू-कश्मीर की राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने जहां इस फैसले का जश्न मनाया है और ईरान की बहादुरी की प्रशंसा की है, वहीं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस युद्ध की सार्थकता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महबूबा मुफ्ती का बयान और ईरान का समर्थन महबूबा मुफ्ती ने इस युद्धविराम को मानवता की जीत करार दिया। उन्होंने कहा, “आज का दिन हमारे लिए बहुत खुशी का है। जिस तरह से ईरान में हजारों लोग मारे गए थे, उससे आशंका थी कि हम तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। मैं अल्लाह का शुक्र अदा करती हूं कि उन्होंने ईरान को इजरायल के खिलाफ डटकर खड़े होने की हिम्मत दी।”

महबूबा ने आगे कहा कि वह ईरान की रणनीति की सराहना करती हैं क्योंकि उसने केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि इजरायल और अमेरिका ने स्कूलों और अस्पतालों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह अस्थायी शांति जल्द ही स्थायी शांति में बदल जाएगी।

पाकिस्तान की भूमिका पर महबूबा का रुख महबूबा मुफ्ती ने इस शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के मामले में पाकिस्तान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने पूरे विश्व को एक महाविनाश से बचाने में मदद की है। बता दें कि शुक्रवार को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बैठक होनी है, जो मार्च के बाद पहला प्रत्यक्ष राजनयिक संपर्क होगा।

उमर अब्दुल्ला के तीखे सवाल दूसरी ओर, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस युद्धविराम के बाद अमेरिका की रणनीति पर तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर #unjustwar हैशटैग के साथ पोस्ट करते हुए पूछा कि इस 40 दिनों के संघर्ष से हासिल क्या हुआ? उन्होंने लिखा, “युद्धविराम के तहत उसी हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोला जा रहा है जो युद्ध से पहले भी सभी के लिए खुला था। आखिर इस खूनी संघर्ष से अमेरिका ने क्या पाया?”

युद्धविराम की वर्तमान स्थिति बुधवार को ईरान, अमेरिका और इजरायल दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम पर सहमत हुए। 1 मार्च के बाद यह पहली बार है जब दोनों दुश्मन देश बातचीत की मेज पर आमने-सामने होंगे। जहां महबूबा इसे ईरान की नैतिक जीत मान रही हैं, वहीं उमर अब्दुल्ला इसे पश्चिमी शक्तियों की विफलता के रूप में देख रहे हैं। कश्मीर के इन दो दिग्गज नेताओं के बयानों ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

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