खड़गपुर में दिलीप घोष का ‘डोমেস্টিক’ दांव! पत्नी संग घर-घर दस्तक, क्या फिर खिलेगा कमल?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में खड़गपुर सदर सीट एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। भाजपा के दिग्गज नेता दिलीप घोष इस बार अपनी पुरानी जमीन वापस पाने के लिए कड़ा पसीना बहा रहे हैं। खड़गपुर सदर उपचुनाव में जीत हासिल करना भाजपा के लिए साख का सवाल बन गया है। इसी सिलसिले में दिलीप घोष ने अपनी पत्नी रिंकू घोष के साथ मिलकर चुनाव प्रचार को एक नई धार दी है।
दिलीप घोष सुबह से ही क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में घूम-घूमकर मतदाताओं से मिल रहे हैं। उनकी पत्नी रिंकू घोष भी उनके कंधे से कंधा मिलाकर घर-घर जाकर महिलाओं और स्थानीय निवासियों से बात कर रही हैं। प्रचार के दौरान दिलीप घोष खुद को ‘मिट्टी का लाल’ और ‘घर का लड़का’ बताकर लोगों का भावनात्मक समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। वे मतदाताओं को विश्वास दिला रहे हैं कि वे उनकी समस्याओं से भली-भांति परिचित हैं और हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे।
गौरतलब है कि पिछले चुनाव में इस सीट पर भाजपा के हिरण चटर्जी ने जीत दर्ज की थी। अब उसी विरासत को बचाए रखने की जिम्मेदारी दिलीप घोष पर है। उनके सामने तृणमूल कांग्रेस के अनुभवी नेता प्रदीप सरकार की कड़ी चुनौती है। प्रदीप सरकार की स्थानीय पकड़ और तृणमूल का संगठनात्मक ढांचा दिलीप घोष की राह में मुश्किलें पैदा कर सकता है।
खड़गपुर सदर में 23 अप्रैल को पहले चरण के तहत मतदान होना है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां भाजपा विकास और हिंदुत्व के साथ-साथ ‘स्थानीय चेहरा’ होने का कार्ड खेल रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी के विकास कार्यों के दम पर वोट मांग रही है। खड़गपुर की जनता का मिजाज क्या है, इसका फैसला 23 अप्रैल को ईवीएम में कैद हो जाएगा।