पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच बढ़ा तनाव

पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच बढ़ा तनाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बुधवार, 8 अप्रैल को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के बीच हुई बैठक ने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। टीएमसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर अपमानजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया है, जबकि आयोग ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

7 मिनट की बैठक और ‘गेट लॉस्ट’ का विवाद

टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि सुबह 10:02 बजे शुरू हुई बैठक महज 5 मिनट में ही खत्म हो गई। ओ’ब्रायन के अनुसार, जब उन्होंने अधिकारियों के तबादलों और निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठाए, तो मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें ‘गेट लॉस्ट’ कहकर कमरे से बाहर जाने को कहा। टीएमसी ने आयोग को चुनौती दी है कि वह इस बैठक का ऑडियो या वीडियो सार्वजनिक करे।

चुनाव आयोग का पक्ष: मर्यादा के उल्लंघन का आरोप

दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने टीएमसी के दावों को सिरे से नकारते हुए प्रतिनिधिमंडल के व्यवहार को अनुचित बताया है। आयोग के मुताबिक, बैठक के दौरान टीएमसी नेता चिल्ला रहे थे और व्यवधान पैदा कर रहे थे। यहां तक कि डेरेक ओ’ब्रायन ने कथित तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त को चुप रहने तक कह दिया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव भयमुक्त, हिंसा मुक्त और प्रलोभन मुक्त कराने के लिए वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

विवाद के मुख्य कारण: मतदाता सूची और तबादले

टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच इस टकराव के पीछे दो बड़े मुद्दे हैं:

  • मतदाता सूची में कटौती: टीएमसी का आरोप है कि ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) के नाम पर भाजपा के पक्ष में काम किया जा रहा है। उनका दावा है कि 60 लाख मतदाताओं के नाम जांच के घेरे में थे, जिनमें से 27 लाख नाम हटा दिए गए हैं। इससे बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई है।
  • बड़े पैमाने पर तबादले: चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते बंगाल में 483 अधिकारियों का तबादला किया है। टीएमसी इसे केंद्र का हस्तक्षेप मान रही है, जबकि आयोग का तर्क है कि 2021 जैसी चुनाव बाद की हिंसा को रोकने के लिए यह कदम अनिवार्य था।

‘स्ट्रैट-टॉक’ के जरिए आयोग की चेतावनी

निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया पर ‘स्ट्रैट-टॉक’ नाम से एक पोस्ट साझा कर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने चेतावनी दी है कि इस बार बंगाल में बूथ कैप्चरिंग, बूथ जैमिंग या ‘सोर्स जैमिंग’ (मतदाताओं को रोकना) जैसी गतिविधियों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग का लक्ष्य बिना किसी डर और छापेमारी के निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में होने हैं, जिसके नतीजे 4 मई को आएंगे। इस विवाद ने राज्य के सियासी तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है।

एक झलक

  • विवाद का केंद्र: टीएमसी ने CEC पर ‘गेट लॉस्ट’ कहने का आरोप लगाया।
  • आयोग का तर्क: प्रतिनिधिमंडल का व्यवहार अमर्यादित था।
  • मुख्य मुद्दा: 27 लाख मतदाताओं के नाम कटना और 483 अधिकारियों का तबादला।
  • चुनाव की तारीखें: 23 और 29 अप्रैल को मतदान, 4 मई को परिणाम।
  • विपक्ष की रणनीति: समान विचारधारा वाली पार्टियां इस मुद्दे पर एकजुट।

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