मिडिल ईस्ट में सीजफायर से भारत को बड़ी राहत क्या अब तेजी से घरों तक पहुंचेंगे एलपीजी सिलेंडर

अमेरिका और ईरान के बीच 7-8 अप्रैल को घोषित दो हफ्तों के संघर्षविराम (सीजफायर) ने न केवल युद्ध के मोर्चे पर बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक नई उम्मीद जगाई है। 28 फरवरी से जारी सैन्य तनाव के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के बीच नरमी देखी गई है। इस समझौते का सबसे बड़ा असर ऊर्जा क्षेत्र और विशेष रूप से भारत जैसे देशों की रसोई गैस (LPG) आपूर्ति पर पड़ने की संभावना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर रहेगा ईरान का नियंत्रण
सीजफायर समझौते के तहत ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सीमित और नियंत्रित आवागमन की अनुमति दे दी है। हालांकि, यह पूरी तरह से स्वतंत्र मार्ग नहीं होगा। ईरान के 10-सूत्रीय संघर्षविराम ढांचे के अनुसार, यहां ‘नियंत्रित आवागमन प्रोटोकॉल’ लागू रहेगा, जिसकी निगरानी ईरानी सशस्त्र बल करेंगे। इसका मतलब है कि जहाजों की आवाजाही पर तेहरान का सीधा प्रभाव बना रहेगा।
भारतीय प्रयासों और आपूर्ति की वर्तमान स्थिति
तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद भारत अपनी रणनीति पर अडिग है। भारतीय झंडे वाले आठ एलपीजी टैंकर पहले ही होर्मुज को पार कर चुके हैं। हाल ही में ‘सी बर्ड’ नामक एक विशाल जहाज लगभग 44,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मंगलुरु पहुंचा है, जहां वर्तमान में अनलोडिंग का काम तेजी से चल रहा है। इसके साथ ही भारत ने अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिनों की छूट का उपयोग करते हुए ईरान से कच्चे तेल और गैस का आयात भी फिर से शुरू कर दिया है।
आत्मनिर्भरता की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
भारत में गैस किल्लत के पीछे मुख्य कारण घरेलू उत्पादन की सीमाएं हैं। देश की कुल एलपीजी जरूरत का केवल 40 प्रतिशत ही भारत में पैदा होता है, जबकि शेष 60 प्रतिशत हिस्सा आयात किया जाता है। आयातित गैस का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही भारत पहुंचता है। पिछले 39 दिनों से बाधित रही सप्लाई चेन के कारण आपूर्ति और मांग के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हो गया है, जिसे भरने में अभी समय लगेगा।
कब तक सामान्य होंगे हालात
विशेषज्ञों और उद्योग जगत के जानकारों का अनुमान है कि यदि यह संघर्षविराम स्थिर रहता है, तो आपूर्ति को सामान्य होने में कम से कम 3 से 6 सप्ताह का समय लग सकता है। सप्लाई चेन बहाल होने से न केवल गैस एजेंसियों के पास पर्याप्त स्टॉक होगा, बल्कि कालाबाजारी पर भी प्रभावी रूप से रोक लग सकेगी।
सरकार के राहत भरे कदम
आपूर्ति संकट को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत दी है। 7 अप्रैल को लिए गए फैसले के अनुसार, 5 किलोग्राम वाले ‘फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर’ के दैनिक कोटे को दोगुना कर दिया गया है। यह कदम समाज के उस वर्ग के लिए संजीवनी साबित होगा जो सबसे ज्यादा प्रभावित था।
एक झलक में
- सीजफायर की अवधि: अमेरिका और ईरान के बीच 2 सप्ताह का संघर्षविराम घोषित।
- होर्मुज की स्थिति: ईरानी सेना के नियंत्रण में जहाजों का सीमित आवागमन शुरू।
- आयात पर निर्भरता: भारत अपनी 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।
- मुख्य खेप: 44,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर ‘सी बर्ड’ जहाज मंगलुरु पहुंचा।
- अनुमानित समय: आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में 3 से 6 हफ्ते लग सकते हैं।
- विशेष राहत: प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले सिलेंडर का कोटा दोगुना किया गया।