सरकारी खरीद में समावेशी विकास का नया अध्याय जेम के नाम

केंद्र सरकार के ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने भारत में सार्वजनिक खरीद प्रणाली की पूरी तस्वीर बदल दी है। आज यह प्लेटफॉर्म न केवल पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का पर्याय बन गया है, बल्कि इसने समावेशी विकास को भी एक नई दिशा दी है। सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और मंत्रालयों के लिए खरीदारी की प्रक्रिया को सरल बनाकर जेम ने देश के छोटे उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
जेम की ऐतिहासिक उपलब्धि और बढ़ता विश्वास
जेम के सीईओ मिहिर कुमार के अनुसार, प्लेटफॉर्म ने अब तक कुल 18.4 लाख करोड़ रुपये के सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) का आंकड़ा पार कर लिया है। विशेष रूप से वित्त वर्ष 2025-26 में 5 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी हासिल करना इसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। यह आंकड़ा केवल व्यापार का विस्तार नहीं है, बल्कि खरीदारों और विक्रेताओं का उस तकनीक-आधारित प्रणाली पर भरोसे का प्रतीक है जिसने बिचौलियों की भूमिका खत्म कर सीधे बाजार से जोड़ा है।
छोटे उद्यमियों और एमएसई को मिला बड़ा मंच
जेम ने सरकारी खरीद के लोकतंत्रीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) की भागीदारी इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
- एमएसई की हिस्सेदारी: वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ऑर्डरों में से 68 प्रतिशत एमएसई को प्राप्त हुए। कुल जीएमवी में इनका योगदान 47.1 प्रतिशत रहा।
- विकास की रफ्तार: 11 लाख से अधिक एमएसई ने 51 लाख से ज्यादा ऑर्डर हासिल किए, जिनका कुल मूल्य ₹2.36 लाख करोड़ रहा। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 20 फीसदी से अधिक की वृद्धि है।
- महिला और एससी/एसटी सशक्तिकरण: महिला उद्यमियों को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिले, जिसमें 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, एससी/एसटी उद्यमों ने भी 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
स्टार्टअप्स और ‘वोकल फॉर लोकल’ को मजबूती
नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टार्टअप्स को जेम पर विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। स्टार्टअप्स ने 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत से अधिक की शानदार वृद्धि है। जेम ने ग्रामीण कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को राष्ट्रीय स्तर का बाजार उपलब्ध कराया है, जिससे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती मिली है।
एक झलक में प्रमुख आंकड़े
- कुल जीएमवी: 18.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक।
- वित्त वर्ष 2025-26 का जीएमवी: 5 लाख करोड़ रुपये।
- एमएसई ऑर्डर शेयर: कुल ऑर्डरों का 68%।
- महिला उद्यमी ऑर्डर: 28,000 करोड़ रुपये (28% वृद्धि)।
- स्टार्टअप ऑर्डर: 19,000 करोड़ रुपये (36% वृद्धि)।
- एससी/एसटी उद्यम ऑर्डर: 6,000 करोड़ रुपये (28% वृद्धि)।