थाली में जहर परोसने वालों के खिलाफ जबरदस्त स्ट्राइक अब तक करोड़ों का जुर्माना और कईयों को जेल

थाली में जहर परोसने वालों के खिलाफ जबरदस्त स्ट्राइक अब तक करोड़ों का जुर्माना और कईयों को जेल

देशभर में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और राज्य सरकारों ने मिलकर मिलावटखोरों के खिलाफ घेराबंदी तेज कर दी है। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य आम जनता को असुरक्षित और घटिया गुणवत्ता वाले भोजन से बचाना है। सिस्टम की बारीकियों को देखें तो FSSAI मानकों का निर्धारण करता है, लेकिन जमीन पर लाइसेंसिंग और कार्रवाई की मुख्य जिम्मेदारी राज्यों की होती है क्योंकि लगभग 98% फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBOs) राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

देशभर में व्यापक स्तर पर जांच और सख्त कार्रवाई

इस साल सरकारी तंत्र ने मिलावटखोरी को जड़ से मिटाने के लिए अभूतपूर्व सक्रियता दिखाई है। आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 3.97 लाख प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान खाद्य पदार्थों के 1.65 लाख से अधिक नमूने लिए गए। जांच के परिणाम चौंकाने वाले रहे क्योंकि लगभग 17% सैंपल सुरक्षा मानकों पर विफल पाए गए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए 23,580 मामलों का निपटारा किया गया और 1,756 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। प्रशासन ने कठोर संदेश देते हुए कुल 154.87 करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूला है।

स्ट्रीट फूड वेंडर्स और लाइसेंसिंग के नए नियम

आम आदमी की सेहत से सीधे जुड़े स्ट्रीट फूड को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने 10 लाख से अधिक वेंडर्स को नियमों के दायरे में शामिल किया है। इससे सड़कों पर बिकने वाले खाने की गुणवत्ता और सफाई में सुधार की उम्मीद है। वहीं व्यापार के टर्नओवर के आधार पर लाइसेंस प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है:

  • बेसिक रजिस्ट्रेशन: 1.5 करोड़ रुपये तक के कारोबार के लिए।
  • स्टेट लाइसेंस: 1.5 से 50 करोड़ रुपये तक के कारोबार के लिए।
  • सेंट्रल लाइसेंस: 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार के लिए।

आधुनिक लैब और निगरानी तंत्र का विस्तार

खाने की शुद्धता की जांच को और सटीक बनाने के लिए सरकार ने 18 नई लैब्स को मंजूरी दी है। इसमें सिक्किम और आंध्र प्रदेश में स्थापित होने वाली अत्याधुनिक लैब्स शामिल हैं। जिला स्तर पर अधिकारी लगातार सैंपलिंग और शिकायतों का निपटारा कर रहे हैं, जबकि गंभीर मामलों की सुनवाई कोर्ट और ट्रिब्यूनल के माध्यम से की जा रही है।

डेटा लीक मामले पर सरकार का रुख

FSSAI से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के लीक होने पर दिल्ली पुलिस की एफआईआर को लेकर मचे बवाल पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी मीडिया संस्थान या पत्रकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि विभाग के भीतर मौजूद उन अज्ञात लोगों के खिलाफ है जिन्होंने गोपनीय रिपोर्ट को सार्वजनिक किया। सरकार के अनुसार इस तरह के लीक से जांच की निष्पक्षता प्रभावित होती है और दोषियों को सतर्क होने का मौका मिलता है। वर्तमान में भर्ती से जुड़ी शिकायतों की आंतरिक जांच अभी जारी है।

एक झलक

  • कुल जांच: 3.97 लाख जगहों पर छापेमारी और निरीक्षण।
  • सैंपल फेल: लगभग 17% खाद्य नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
  • जुर्माना: नियम तोड़ने वालों पर 154.87 करोड़ रुपये का आर्थिक दंड।
  • सजा: 1,756 मामलों में दोषियों को जेल या कानूनी सजा।
  • रिकॉल: 945 बार असुरक्षित खाद्य उत्पादों को बाजार से वापस मंगवाया गया।
  • स्ट्रीट फूड: 10 लाख वेंडर्स अब सरकारी नियमों के दायरे में।
  • नई सुविधा: 18 नई आधुनिक टेस्टिंग लैब्स को मिली मंजूरी।

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