अप्रैल में जनवरी जैसा अहसास उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान

अप्रैल में जनवरी जैसा अहसास उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान

उत्तर भारत में मौसम के बदलते मिजाज ने सामान्य जनजीवन और कृषि क्षेत्र को गहरे संकट में डाल दिया है। अप्रैल के महीने में, जब आमतौर पर गर्मी की शुरुआत होती है, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ सहित पूरे क्षेत्र में जनवरी जैसी ठंड का अहसास हो रहा है। तेज हवाओं, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने न केवल तापमान में भारी गिरावट दर्ज की है, बल्कि किसानों की साल भर की मेहनत पर भी पानी फेर दिया है।

चंडीगढ़ में टूटा पांच साल का रिकॉर्ड

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला (ट्राइसिटी) में बीते मंगलवार को अधिकतम तापमान महज 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य तापमान से 5.4 डिग्री कम है। विशेष रूप से 7 अप्रैल को पिछले पांच वर्षों में सबसे ठंडा दिन रिकॉर्ड किया गया है। बेमौसम की इस ठंड और बारिश ने शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है।

किसानों पर मौसम की दोहरी मार

पंजाब और हरियाणा के खेतों में गेहूं की फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी। विशेषज्ञों का मानना है कि फसल के पकने के इस चरण में दानों का सूखना अनिवार्य होता है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसलें जमीन पर बिछ गई हैं।

  • खेतों में बर्बादी: ओलावृष्टि से गेहूं की बालियों को सीधा नुकसान पहुंचा है।
  • मंडियों में अव्यवस्था: जो किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंचे हैं, वहां भी जलभराव और तिरपाल की कमी के कारण गेहूं भीग रहा है।
  • आर्थिक संकट: फसल खराब होने से किसानों के सामने कर्ज चुकाने और अगली बुवाई के लिए निवेश का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और सरकार का रुख

फसलों की तबाही अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। विपक्षी दलों, कांग्रेस और भाजपा ने इस स्थिति को लेकर पंजाब सरकार पर निशाना साधा है।

कांग्रेस का तर्क है कि किसान अभी पिछली बाढ़ के नुकसान से उबर भी नहीं पाए थे कि इस प्राकृतिक आपदा ने उन्हें फिर तोड़ दिया है। वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया है कि सरकार की ओर से फसल बीमा योजनाओं को गंभीरता से लागू न करने के कारण किसानों को तुरंत मुआवजा नहीं मिल पा रहा है।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आश्वासन दिया है कि अधिकारियों को तत्काल गिरदावरी (फसल नुकसान का आकलन) करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने दावा किया है कि संकट की इस घड़ी में किसानों की हर संभव सहायता की जाएगी।

एक झलक में

  • तापमान में गिरावट: चंडीगढ़ में 5 साल का रिकॉर्ड टूटा, तापमान सामान्य से 5.4 डिग्री कम।
  • प्रमुख प्रभावित क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला।
  • फसल का नुकसान: कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल बारिश और ओलावृष्टि से तबाह।
  • मुख्य मांग: किसानों ने सरकार से तत्काल मुआवजे और आर्थिक सहायता की अपील की है।
  • सरकारी कदम: मुख्यमंत्री ने फसल नुकसान के आकलन के लिए गिरदावरी के आदेश दिए।

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