नारी शक्ति वंदन अधिनियम में ओबीसी आरक्षण की मांग ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में ओबीसी आरक्षण की मांग ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। महिला आरक्षण के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित करने की मांग अब विपक्षी दलों का मुख्य हथियार बन गई है। इस मुद्दे ने न केवल सरकार के लिए रणनीतिक चुनौतियां पेश की हैं, बल्कि आगामी विशेष सत्र में भारी हंगामे के संकेत भी दे दिए हैं।

विपक्ष की बढ़ती एकजुटता और राहुल गांधी पर दबाव

इंडिया (INDIA) गठबंधन के कई घटक दल इस समय कांग्रेस और विशेष रूप से राहुल गांधी पर दबाव बना रहे हैं। विपक्षी दलों का तर्क है कि सामाजिक न्याय की लड़ाई को तब तक पूर्ण नहीं माना जा सकता, जब तक आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित न हो।

  • गठबंधन की रणनीति: विपक्षी दल चाहते हैं कि राहुल गांधी केवल ओबीसी गणना की बात न करें, बल्कि संसद में इस आरक्षण की मांग को पूरी मजबूती से रखें।
  • आंतरिक समर्थन: कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने भी इसी तरह की मांग दोहराई है, जिससे पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर सहमति बनती दिख रही है।
  • दक्षिण बनाम उत्तर का विवाद: विपक्ष पहले ही परिसीमन के बाद दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम होने की आशंका जताकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है।

सरकार के सामने संख्या बल की बड़ी चुनौती

साल 2023 के मुकाबले वर्तमान राजनीतिक समीकरण काफी बदल चुके हैं। इस महत्वपूर्ण विधेयक को संवैधानिक रूप देने और पारित कराने के लिए सरकार को सदन में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है।

  • जादुई आंकड़ा: विधेयक को पारित करने के लिए कम से कम 364 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।
  • विपक्ष की अनिवार्यता: वर्तमान स्थिति में बिना विपक्षी दलों के सहयोग के इस आंकड़े तक पहुंचना सरकार के लिए बेहद कठिन नजर आ रहा है। ऐसे में सरकार को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

विशेष सत्र में टकराव की संभावना

16 अप्रैल से शुरू होने वाले तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान इस मुद्दे पर तीखी बहस और हंगामे के पूरे आसार हैं। एक तरफ जहां सरकार इस ऐतिहासिक कदम को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहती है, वहीं विपक्ष इसे ‘अधूरा न्याय’ बताकर घेरने की तैयारी में है। यदि राहुल गांधी इस मांग का खुलकर समर्थन करते हैं, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।

एक झलक

  • मुख्य मांग: महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी कोटा शामिल करने की जिद।
  • विपक्ष का रुख: राहुल गांधी पर आरक्षण की मांग को लेकर दबाव बढ़ा।
  • संसदीय गणित: विधेयक पास कराने के लिए सरकार को चाहिए 364 सांसदों का साथ।
  • आगामी सत्र: 16 अप्रैल से शुरू हो रहे विशेष सत्र में हंगामे की प्रबल आशंका।

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