यमुना का कायाकल्प दिल्ली में मिशन मोड पर एलजी और सीएम ने किया ग्राउंड विजिट

दिल्ली की जीवनदायिनी कही जाने वाली यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए अब सरकार ने अपनी कमर कस ली है। उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संयुक्त रूप से यमुना के विभिन्न घाटों का निरीक्षण कर ‘यमुना मिशन’ की समीक्षा की। इस यात्रा के दौरान न केवल चल रहे कार्यों की प्रगति देखी गई, बल्कि प्रदूषण और जल संकट जैसी बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एक ठोस रणनीतिक खाका भी तैयार किया गया।
घाटों का आधुनिक स्वरूप और नई रणनीति
एलजी और सीएम ने कश्मीरी गेट स्थित वासुदेव घाट और यमुना बाजार घाट का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा विकसित किए गए वासुदेव घाट, असिता और बनसेरा जैसे स्थल अब सार्वजनिक आकर्षण के केंद्र बन रहे हैं। प्रशासन की योजना अब वजीराबाद से ओखला तक के पूरे क्षेत्र को इसी तर्ज पर विकसित करने की है।
- स्थायी संपत्ति का निर्माण: हर साल अस्थायी घाटों पर खर्च करने के बजाय अब यमुना तटों को स्थायी और भव्य सार्वजनिक स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।
- प्राकृतिक स्वरूप की सुरक्षा: नदी के किनारे कच्चे वॉकिंग ट्रेल्स और साइक्लिंग ट्रैक बनाए जा रहे हैं ताकि नदी की पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुंचे।
- अतिक्रमण पर प्रहार: अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यमुना की वॉटर होल्डिंग क्षमता बढ़ाने के लिए बाढ़ क्षेत्र (Floodplain) से तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए।
जन-संवाद और सामूहिक प्रयास
उपराज्यपाल ने बताया कि यह ग्राउंड विजिट नागरिकों के साथ हुए ‘औचक संवाद’ का परिणाम है। दिल्लीवासियों ने प्रदूषण और बाढ़ जैसे मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की थी, जिसे सरकार ने प्राथमिकता पर रखा है। यमुना की सफाई अब केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं होगी। सिंचाई विभाग, दिल्ली जल बोर्ड और एमसीडी जैसे सभी संबंधित विभागों को अब एक विस्तृत प्रस्तुति के साथ लक्ष्य और समय-सीमा तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
बजट और वैश्विक विशेषज्ञता का साथ
यमुना स्वच्छता केवल एक परियोजना नहीं बल्कि दिल्ली सरकार का संकल्प बन चुका है। इसके लिए साल 2026-27 के बजट में 22,236 करोड़ रुपये का भारी-भरकम ‘ग्रीन बजट’ आवंटित किया गया है, जो कुल बजट का लगभग 21.44% है। इस फंड का बड़ा हिस्सा सीवेज ट्रीटमेंट और डी-सिल्टिंग के लिए इस्तेमाल होगा।
इसके अतिरिक्त, इस मिशन में अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी ताकि दिल्ली में दुनिया के बेहतरीन मॉडलों को लागू किया जा सके। केंद्र सरकार के सहयोग से यमुना पुनर्जीवन को प्रधानमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
एक झलक
- प्रमुख लक्ष्य: पल्ला से कालिंदी कुंज तक पूरे बाढ़ क्षेत्र का पुनरुद्धार करना।
- ग्रीन बजट: 22,236 करोड़ रुपये का आवंटन, जो कुल बजट का 21.44% है।
- जीरो टॉलरेंस: ठोस कचरा प्रबंधन और अवैध कचरा निस्तारण पर सख्त नीति।
- विशेष फोकस: वेटलैंड्स का संरक्षण, जैव-विविधता पार्क और ग्रीनवे विकास।
- भविष्य की योजना: सभी घाटों को एक ‘कंटीन्यूअस स्ट्रेच’ (निरंतर श्रृंखला) के रूप में जोड़ना।