टाटा संस की लिस्टिंग पर सस्पेंस के बीच आरबीआई ला रहा है नया फ्रेमवर्क

टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा संकेत दिया है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बैंक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए जल्द ही एक नया रेगुलेटरी ढांचा पेश करने वाला है। इस घोषणा के बाद बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या टाटा संस को अनिवार्य लिस्टिंग से राहत मिलेगी या उसे सार्वजनिक होना ही पड़ेगा।
एनबीएफसी के लिए नया ढांचा और आरबीआई का रुख
मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई एनबीएफसी के वर्गीकरण और उनके संचालन के लिए नियमों का एक नया सेट तैयार कर रहा है। हालांकि उन्होंने टाटा संस के विशिष्ट मामले पर सीधे तौर पर विस्तार से कुछ नहीं कहा, लेकिन यह जरूर बताया कि नया फ्रेमवर्क एनबीएफसी को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया नियम टाटा संस जैसी ‘कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों’ के भविष्य को तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है।
अनिवार्य लिस्टिंग की समय सीमा और चुनौतियां
आरबीआई के मौजूदा ‘अपर लेयर’ नियमों के अनुसार, टाटा संस को 30 सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट हो जाना चाहिए था। इस सूची में शामिल 15 प्रमुख कंपनियों में से केवल टाटा संस ही ऐसी कंपनी है जिसने अब तक लिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं की है।
टाटा संस के लिए लिस्टिंग एक जटिल मुद्दा है क्योंकि:
- पारदर्शिता का दबाव: लिस्टिंग के बाद कंपनी को अपनी वित्तीय जानकारी और निर्णयों को सार्वजनिक रूप से साझा करना होगा।
- विविध कारोबार: टाटा समूह नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक के विशाल क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिससे एकीकृत नियमों का पालन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- पूंजी संरचना: कंपनी वर्तमान में एक निजी होल्डिंग कंपनी के रूप में काम करना पसंद करती है ताकि रणनीतिक नियंत्रण बना रहे।
शापूरजी पालोनजी समूह की नजरें
टाटा संस की लिस्टिंग का सबसे ज्यादा इंतजार शापूरजी पालोनजी (SP) समूह को है। टाटा संस में 18 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखने वाला यह समूह वर्तमान में वित्तीय संकट से जूझ रहा है। यदि टाटा संस की लिस्टिंग होती है, तो एसपी समूह के लिए अपनी हिस्सेदारी का मूल्य निर्धारण करना और उसके जरिए फंड जुटाना काफी आसान हो जाएगा।
फिनो पेमेंट्स बैंक पर चुप्पी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरबीआई अधिकारियों से फिनो पेमेंट्स बैंक के सीईओ ऋषि गुप्ता की गिरफ्तारी को लेकर भी सवाल पूछे गए। हालांकि, आरबीआई ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। बाजार में यह चिंता थी कि क्या इस गिरफ्तारी का असर बैंक के ‘स्मॉल फाइनेंस बैंक’ बनने के लक्ष्य पर पड़ेगा, जिसे आरबीआई से पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।
एक झलक
- आरबीआई जल्द ही एनबीएफसी के लिए नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जारी करेगा।
- टाटा संस ‘अपर लेयर’ एनबीएफसी श्रेणी में होने के बावजूद अब तक लिस्ट नहीं हुई है।
- लिस्टिंग की समय सीमा बीत जाने पर आरबीआई ने कहा कि कंपनी लाइसेंस रद्द होने तक कारोबार जारी रख सकती है।
- शापूरजी पालोनजी समूह के लिए टाटा संस की लिस्टिंग वित्तीय राहत का जरिया बन सकती है।
- नए नियमों के आने तक टाटा संस की लिस्टिंग पर सस्पेंस बरकरार रहने की संभावना है।