ईरान अमेरिका युद्ध विराम क्या ट्रंप का आत्मसमर्पण है या सोची समझी रणनीति

ईरान अमेरिका युद्ध विराम क्या ट्रंप का आत्मसमर्पण है या सोची समझी रणनीति

ईरान और अमेरिका के बीच 39 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद हुआ युद्ध विराम वैश्विक राजनीति में एक नया मोड़ ले आया है। तेहरान पर हमलों और गंभीर धमकियों के बाद वाशिंगटन का अचानक पीछे हटना कई सवाल खड़े कर रहा है। करीब 40 बिलियन डॉलर खर्च करने के बावजूद अमेरिका के हाथ वह सफलता नहीं लगी जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसके विपरीत अमेरिका को ईरान की शर्तों पर एक अस्थाई समझौता करना पड़ा है जिसे विशेषज्ञों द्वारा ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक हार के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान की शर्तों के आगे क्यों झुका अमेरिका

युद्ध से पहले अमेरिका ने ईरान पर भारी दबाव बनाया था लेकिन वर्तमान स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने इस समझौते को इजरायल के लिए आत्मघाती बताया है। अमेरिका के भीतर भी राष्ट्रपति ट्रंप की तीखी आलोचना हो रही है क्योंकि ईरान अब अपनी शर्तों पर बात कर रहा है।

अमेरिका की हार के 5 मुख्य कारण

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण: समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि अब होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ईरान टोल वसूलेगा। पहले यह आवाजाही मुफ्त थी। अमेरिका ईरान को यूरेनियम शिफ्ट करने के लिए मजबूर नहीं कर पाया और केवल होर्मुज को सशर्त खुलवाने पर सहमत होना पड़ा।
  • आनन-फानन में लिया गया फैसला: जानकारों का मानना है कि युद्ध की बढ़ती लागत से परेशान होकर अमेरिका ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया। इसके लिए मिडिल ईस्ट के अपने सहयोगियों से भी सलाह मशविरा नहीं किया गया।
  • प्रतिष्ठा को ठेस: अमेरिकी सीनेटर क्रिस मॉर्फी के अनुसार ईरान के प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार करना एक तरह का आत्मसमर्पण है। इससे दुनिया भर में यह संदेश गया है कि अमेरिका होर्मुज पर ईरान के वर्चस्व को खत्म करने में विफल रहा।
  • भविष्य की वार्ताओं में कमजोरी: अब अमेरिका ईरान को युद्ध की धमकी देकर डरा नहीं सकता। ईरान ने इस जंग के सबसे बुरे दौर का सामना कर लिया है और अब आगे की बातचीत केवल व्यावसायिक हितों पर आधारित होगी।
  • सत्ता परिवर्तन की विफलता: ट्रंप ने शुरुआत में ईरान में तख्तापलट की बात कही थी लेकिन इस्लामिक गणराज्य पर सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की पकड़ अब भी मजबूत है। ट्रंप को समझौते के लिए उन्हीं से संपर्क साधना पड़ा।

ट्रंप का बचाव और दावों की हकीकत

ट्रंप ने इन शर्तों को ‘बेहतरीन’ करार दिया है और दावा किया है कि ईरान सैन्य रूप से टूट चुका है और अब खतरा नहीं है। हालांकि व्हाइट हाउस इसे जीत बता रहा है लेकिन जमीनी हकीकत और रणनीतिकारों का विश्लेषण एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है जहां ईरान एक मजबूत मोलभाव करने वाली स्थिति में नजर आ रहा है।

एक झलक

  • युद्ध की अवधि: 39 दिन का सक्रिय संघर्ष।
  • आर्थिक नुकसान: अमेरिका ने लगभग 40 बिलियन डॉलर खर्च किए।
  • मुख्य समझौता: होर्मुज जलडमरूमध्य को टोल के साथ सशर्त खोलना।
  • ईरान की स्थिति: परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय नियंत्रण पर पकड़ बरकरार।
  • आलोचना: अमेरिकी सीनेटरों और इजरायल के पूर्व नेतृत्व द्वारा समझौते का विरोध।

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