ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम से ओमान की किस्मत चमकने वाली है

ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया युद्धविराम ने खाड़ी क्षेत्र के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस शांति समझौते से जहां जॉर्डन, यूएई और बहरीन जैसे देश कुछ हद तक असहज नजर आ रहे हैं, वहीं ओमान के लिए यह किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। विशेष बात यह है कि पूरे संघर्ष के दौरान ओमान ने तटस्थ भूमिका निभाई थी और अब इस शांति का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ उसे मिलने की उम्मीद है।
ओमान की रणनीतिक स्थिति और टोल बूथ का प्रस्ताव
खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का एक हिस्सा ओमान की सीमा से सटा हुआ है, जबकि दूसरी ओर ईरान स्थित है। युद्धविराम के बाद ईरान ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत वह ओमान के साथ मिलकर इस जलमार्ग पर एक ‘टोल बूथ’ स्थापित करना चाहता है।
ईरान का मानना है कि चूंकि यह जलमार्ग उसके नियंत्रण और सुरक्षा क्षेत्र में आता है, इसलिए यहां से गुजरने वाले हर मालवाहक जहाज को शुल्क देना चाहिए। शुरुआती योजना के अनुसार, प्रत्येक जहाज से लगभग 2 मिलियन डॉलर वसूलने का लक्ष्य रखा गया है।
ओमान को होने वाला आर्थिक मुनाफा
यदि यह टोल टैक्स प्रणाली लागू होती है, तो ओमान को बिना किसी बड़े निवेश के अरबों डॉलर की कमाई होगी।
- राजस्व का अनुमान: ईरान इस टोल के जरिए सालाना 500 बिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रहा है।
- ओमान की हिस्सेदारी: कयास लगाए जा रहे हैं कि टोल का आधा हिस्सा ओमान को मिल सकता है।
- संभावित लाभ: इस स्थिति में ओमान को प्रति वर्ष लगभग 250 बिलियन डॉलर का शुद्ध मुनाफा हो सकता है।
ईरान क्यों दे रहा है ओमान को इतनी अहमियत
ईरान द्वारा ओमान को इस मुनाफे में शामिल करने के पीछे गहरी कूटनीति छिपी है। होर्मुज का एक सिरा ओमान के पास होने के कारण, यदि ओमान भविष्य में अमेरिका को वहां सैन्य बेस बनाने की अनुमति देता है, तो यह ईरान के लिए सुरक्षा का बड़ा खतरा बन सकता है।
पिछले संघर्ष के दौरान भी ओमान ने अमेरिका को अपना एयरस्पेस और सैन्य उपयोग के लिए जगह देने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण अमेरिका को कुवैत और यूएई का रास्ता अपनाना पड़ा। ईरान अब टोल टैक्स में हिस्सेदारी देकर भविष्य के लिए ओमान के साथ अपनी सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है।
शांति और स्थिरता का नया दौर
ओमान के विदेश मंत्री अल बुसैदी ने इस सीजफायर का खुले दिल से स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया कि यह कदम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए अनिवार्य था। ओमान की तटस्थ नीति ने उसे आज एक ऐसी स्थिति में खड़ा कर दिया है, जहां वह बिना युद्ध में शामिल हुए क्षेत्र की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभर सकता है।
एक झलक में
- ईरान और अमेरिका के युद्धविराम से ओमान को सबसे ज्यादा आर्थिक फायदा मिलने की उम्मीद है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों से टोल टैक्स वसूलने के लिए ईरान और ओमान मिलकर काम कर सकते हैं।
- प्रत्येक मालवाहक जहाज से 2 मिलियन डॉलर वसूलने का प्रस्ताव है।
- ओमान को सालाना 250 बिलियन डॉलर तक का मुनाफा हो सकता है।
- युद्ध के दौरान ओमान द्वारा अमेरिका को सैन्य बेस न देना उसके लिए फायदेमंद साबित हुआ।