सुप्रीम कोर्ट की मेरठ के पूर्व कमिश्नर को कड़ी फटकार अवैध संपत्तियों को सील करने का दिया आदेश

उत्तर प्रदेश के मेरठ में सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में मेरठ के पूर्व मंडलायुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा कि किस अधिकार के तहत उन्होंने पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्देशों की अवहेलना की और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोकने का आदेश जारी किया।
न्यायिक आदेशों की अवहेलना पर नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूर्व कमिश्नर को अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया था। पीठ ने उनके उस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मास्टर प्लान में संशोधन के माध्यम से इन दुकानों को ‘बाजार गली’ का दर्जा दिया जाएगा, इसलिए इन्हें न तोड़ा जाए। अदालत ने इसे सीधे तौर पर न्यायिक आदेशों का उल्लंघन माना है।
अवैध संपत्तियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की टीम ने बुधवार से सेंट्रल मार्केट की 44 अवैध संपत्तियों को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक की कार्रवाई में शामिल हैं:
- दो प्रमुख अस्पताल
- दो स्कूल
- कुल आठ अवैध निर्माण अब तक सील किए जा चुके हैं
विरोध और भ्रष्टाचार के आरोप
आवास विकास की टीम को मौके पर व्यापारियों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति तनावपूर्ण होने के कारण कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी। व्यापारियों का आरोप है कि उन्होंने भू-उपयोग परिवर्तन (Land use change) के लिए परिषद को 70 करोड़ रुपये का शुल्क दिया है। व्यापारियों ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए पहले इस राशि का हिसाब देने की मांग की है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
यह पूरा मामला आवासीय भूखंडों को बिना स्वीकृत लेआउट के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, स्कूलों और अस्पतालों में बदलने से जुड़ा है। जांच में पाया गया कि ये निर्माण न केवल अवैध हैं, बल्कि इनमें बुनियादी अग्नि सुरक्षा उपायों (Fire Safety) का भी अभाव है, जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं।
एक झलक में
- सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को तुरंत सील करने का निर्देश दिया।
- पूर्व कमिश्नर ऋषिकेश भास्कर यशोद को कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर फटकार लगी।
- आवास विकास परिषद ने सीलिंग अभियान शुरू किया, जिसमें अस्पताल और स्कूल भी शामिल हैं।
- व्यापारियों ने 70 करोड़ रुपये के शुल्क के भुगतान का दावा करते हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
- बिना फायर सेफ्टी और स्वीकृत मैप के चल रहे थे ये व्यावसायिक प्रतिष्ठान।