इस्लामाबाद शांति वार्ता विफल! अमेरिका की ‘अनुचित मांगों’ पर भड़का ईरान, २१ घंटे की चर्चा का नहीं निकला हल

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में २१ घंटे तक चली मैराथन चर्चा के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हो सका है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार सुबह घोषणा की कि ईरान द्वारा अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार करने के बाद वे बिना किसी शांति समझौते के वापस लौट रहे हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम चल रहा है, लेकिन इस बैठक की विफलता ने फिर से युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

ईरान का पलटवार: ईरान के सरकारी मीडिया ने अमेरिका पर ‘अनुचित और अवैध मांगों’ का आरोप लगाया है। ईरान की ‘फार्स न्यूज एजेंसी’ के अनुसार, अमेरिका ने उन मुद्दों पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश की जिन्हें वह युद्ध के मैदान में नहीं जीत पाया था। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और शांतिपूर्ण परमाणु परियोजनाओं को लेकर तकरार बनी रही। ईरान के एक सूत्र ने दावा किया कि अमेरिका केवल अपनी हार की शर्मिंदगी छिपाने के लिए बातचीत की मेज पर आया था, लेकिन अपनी अपेक्षाओं को कम करने के लिए तैयार नहीं था।

अमेरिका का पक्ष: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उन्होंने ईरान को अपना ‘सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव’ दिया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “समझौता न होना ईरान के लिए शुभ नहीं है। यह विफलता अमेरिका से ज्यादा ईरान को नुकसान पहुंचाएगी।” इस बैठक के दौरान वेंस लगातार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के संपर्क में थे। अमेरिकी टीम में वेंस के साथ जैरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ शामिल थे, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अरागची और स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने प्रतिनिधित्व किया। १९७९ की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहली बार था जब दोनों देशों के बीच इतने उच्च स्तर पर बातचीत हुई, लेकिन परिणाम शून्य रहा।

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