हाईकोर्ट की हरी झंडी के बाद भड़के आंदोलनकारी; पेंडिंग डीए नहीं मिला तो ठप होगा कामकाज?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव २०२६ की आहट के बीच महंगाई भत्ते (DA) को लेकर संग्राम तेज हो गया है। सुप्रिम कोर्ट के आदेश और राज्य सरकार के दावों के बीच विरोधाभास को लेकर शुक्रवार, ১২ এপ্রিল को ‘संग्रामी जोउथो मंच’ ने हाजरा मोड़ पर विशाल विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि सरकार बकाया डीए चुकाने का झूठा दावा कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत में शिक्षकों और कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिला है।
हाईकोर्ट की शर्त और प्रदर्शन: पुलिस से अनुमति न मिलने के बाद मंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने दोपहर ১২ बजे से ৩ बजे तक शर्तों के साथ सभा की अनुमति दी। हजारों की संख्या में जुटे कर्मचारियों ने हाजरा मोड़ से अपनी आवाज बुलंद की और रिक्त पदों को भरने की भी मांग दोहराई।
सरकार को दी ‘डेडलाइन’: संगठन ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि २० अप्रैल तक उनकी सभी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र बनाया जाएगा। मंच के सदस्यों का कहना है कि चुनावी ड्यूटी पर तैनात उनके एक साथी पर हमला हुआ है, जो बर्दाश्त से बाहर है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा, “अगर २० अप्रैल तक बकाया नहीं मिला, तो आने वाले चुनाव में हम वोट के जरिए सरकार को सबक सिखाएंगे।” राज्य कर्मचारियों का यह कड़ा रुख चुनावी माहौल में सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।