कैंसररोधी, एंटी-वायरल, क्यों तुलसी को बताया गया ‘आयुर्वेद की मां’? बनाने की सरल विधि यहां!
भारत की पवित्र भूमि पर उगने वाली तुलसी को आयुर्वेद में ‘मां की तरह देखभाल करने वाली जड़ी-बूटी’ कहा गया है। यह सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका सेवन वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को नियंत्रित करने में सहायक है।
बरसात के मौसम में संक्रमण और सर्दियों में ठंड के कारण खांसी, जुकाम व गले की खराश आम है। इन मौसमी संक्रमणों से बचने के लिए विशेषज्ञ तुलसी के काढ़े को रामबाण इलाज मानते हैं। तुलसी के पत्तों को अदरक, काली मिर्च, दालचीनी, मुलेठी जैसे मसालों के साथ उबालकर तैयार यह आयुर्वेदिक पेय एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुणों से भरपूर है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को जबरदस्त तरीके से बढ़ाता है।
काढ़ा पीने के चमत्कारी फायदे:
- सर्दी-खांसी में तुरंत आराम, बलगम और कफ को बाहर निकालता है।
- वायरल, डेंगू और मलेरिया जैसे बुखार में विशेष रूप से लाभकारी।
- पाचन तंत्र को मजबूत करता है; गैस, अपच और पेट दर्द में राहत देता है।
- शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मददगार और हृदय व श्वसन तंत्र की रक्षा करता है।
चरक संहिता में तुलसी को कृमिनाशक और कफनाशक बताया गया है, वहीं सुश्रुत संहिता में इसे श्वसन रोगों और विषहर औषधि के रूप में वर्णित किया गया है। आधुनिक शोधों ने इसे H1N1, डेंगू, मलेरिया और सामान्य सर्दी-जुकाम में प्रभावी सिद्ध किया है। इसके फाइटोकेमिकल्स DNA को टूटने से बचाते हैं, इसलिए इसे प्राकृतिक कैंसर-रोधी भी कहा जाता है।
इम्यूनिटी बूस्टर काढ़ा बनाने की आसान विधि: एक गिलास पानी में ५-७ तुलसी के पत्ते, १ इंच अदरक का टुकड़ा, ३-४ काली मिर्च और थोड़ी दालचीनी डालकर पानी आधा होने तक उबालें। ठंडा होने पर स्वाद के लिए शहद मिला सकते हैं। यह काढ़ा दिन में १-२ बार पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।