घर में माँ काली की प्रतिमा रखें या नहीं? जानें धार्मिक और वास्तु का सटीक मत

देवी भागवत और कालिका पुराण जैसे प्रमुख ग्रंथों में माँ काली को शक्ति और रौद्र स्वरूप वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है। हालांकि, इन शास्त्रों में घर के भीतर माँ की प्रतिमा स्थापित करने या न करने के बारे में कोई स्पष्ट निर्देशिका नहीं है। अधिकांश वर्णन उनके शक्ति रूप, विनाशकारी और रक्षक गुणों पर ही केंद्रित हैं। तांत्रिक और शक्ति परंपराओं से जुड़े ग्रंथों में यह अवश्य कहा गया है कि उनके कुछ उग्र स्वरूपों की पूजा विशेष विधि और प्रशिक्षित गुरु के मार्गदर्शन में ही की जानी चाहिए।
वास्तु शास्त्र का दृष्टिकोण है कि उग्र या भयावह स्वरूप वाली प्रतिमाएँ, जैसे माँ काली का रौद्र रूप, यदि बिना सही दिशा और विधि के रखी जाएँ तो ऊर्जा संतुलन प्रभावित हो सकता है। वास्तु विशेषज्ञ प्रतिमा को पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखने की सलाह देते हैं और कहते हैं कि मूर्ति ज़मीन से ऊपर और साफ जगह पर होनी चाहिए। लोकमान्यताओं के अनुसार, विधिपूर्वक पूजा और सम्मानपूर्वक रखरखाव से ही घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, अन्यथा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।