आंखों के ‘साइलेंट किलर’ हैं हाई शुगर! डायबिटीज मरीज तुरंत पहचान लें ये 3 चेतावनी संकेत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त में लंबे समय तक उच्च शर्करा का स्तर (High Blood Sugar) रहने से आंखों की रोशनी तेज़ी से या धीरे-धीरे कम हो सकती है। लंबे समय से चला आ रहा मधुमेह (Diabetes) आंख के पीछे स्थित प्रकाश-संवेदनशील रेटिना के हिस्से में मौजूद सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Tiny Blood Vessels) को नुकसान पहुंचाता है। यह आंखों की जटिलता डायबिटिक रेटिनोपैथी कहलाती है, जो मधुमेह से पीड़ित लोगों में अंधेपन का एक प्रमुख कारण है।
👁️ आंखें कैसे होती हैं क्षतिग्रस्त?
आंख का रेटिना वह प्रकाश-संवेदनशील ऊतक (Tissue) है जो देखने की जानकारी मस्तिष्क तक पहुंचाता है। रेटिना को पोषण और ऑक्सीजन कई महीन रक्त वाहिकाओं के माध्यम से मिलता है।
१. वाहिकाओं को नुकसान: लंबे समय तक उच्च रक्त शर्करा रहने के कारण ये सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं, उनमें लीकेज (तरल जमाव) हो सकता है, या वे बंद हो सकती हैं। २. ऑक्सीजन की कमी: रक्त वाहिकाओं के बंद होने से रेटिना तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता। इसकी क्षतिपूर्ति के लिए रेटिना में नई, लेकिन अनियंत्रित और नाजुक रक्त वाहिकाएं विकसित होने लगती हैं। ३. रक्तस्राव: ये नाजुक वाहिकाएं आसानी से फट जाती हैं, जिससे आंख के अंदरूनी जैल (विट्रियस) में खून जमा हो सकता है, जो दृष्टि पर तुरंत प्रभाव डालता है।
शुरुआत में, इन समस्याओं के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, जिससे समय पर पहचान मुश्किल हो जाती है। हालांकि, इन लक्षणों को देखने पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए:
- अचानक दृष्टि धुंधली हो सकती है, या रंग फीके दिखाई दे सकते हैं।
- आंखों के सामने तैरते हुए छोटे धब्बे या ‘फ्लोटर्स’ दिखाई दे सकते हैं।
- एक आंख दूसरी आंख की तुलना में कम दिखाई दे सकती है या रात की रोशनी में दृष्टि कम हो सकती है।
जब स्थिति अधिक जटिल हो जाती है, तो रेटिना के केंद्रीय भाग मैक्युला में तरल पदार्थ जमा हो सकता है (डायबिटिक मैकुलर एडिमा), जिससे दृष्टि विकृत हो सकती है। जो लोग लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित हैं, या जिनका रक्त शर्करा, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण अच्छा नहीं है, उनमें आंखों की जटिलताएं होने का खतरा बहुत अधिक होता है।
🛡️ रोकथाम के उपाय
विशेषज्ञों की सलाह है कि इस जटिलता से बचने के लिए शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना सबसे बड़ा बचाव है। इसके अलावा:
- रक्तचाप (BP) और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखना आवश्यक है।
- हर साल कम से कम एक बार रेटिना की जांच कराना ज़रूरी है, भले ही आपको कोई समस्या महसूस न हो।
- सब्जियां और ओमेगा-३ से भरपूर भोजन करें।
- आंखों की कोई समस्या पकड़ी जाने पर तुरंत उपचार शुरू करें। रेटिना की क्षति तेज़ी से बढ़ने पर लेजर थेरेपी, इंजेक्शन या अंत में आंखों का ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं और अपनी आंखों की रोशनी में अचानक या धीरे-धीरे कोई बदलाव देखते हैं, तो देर न करें और तुरंत किसी नेत्र विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से सलाह लें।