हाई कोलेस्ट्रॉल का नया संकेत, नसों में प्लाक जमने से पैरों में होता है तेज़ दर्द, जानें LDL-HDL का ख़तरा और बचने के 5 तरीक़े

कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा पदार्थ है जो रक्त में पाया जाता है और स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक है। हालाँकि, यह ज़रूरी पदार्थ अगर शरीर में ज़्यादा हो जाए, तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकता है। हाल ही में पता चला है कि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल पैरों में तेज़ दर्द का कारण भी बन सकता है।

मुख्य रूप से दो प्रकार के कोलेस्ट्रॉल होते हैं: एलडीएल (LDL) या बुरा कोलेस्ट्रॉल, और एचडीएल (HDL) या अच्छा कोलेस्ट्रॉल।

  • LDL (बुरा): यह रक्त वाहिकाओं के अंदर जमा होकर प्लाक बनाता है, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा आती है और दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ता है।
  • HDL (अच्छा): यह हृदय के लिए अच्छा होता है और इसकी मात्रा ज़्यादा होने पर समस्याओं का ख़तरा कम होता है।

शरीर में कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) जैसी समस्याएँ पैदा कर सकता है, जिससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक हो सकता है।

पैरों की समस्या और उसके लक्षण

जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो यह पैरों की रक्त वाहिकाओं में जमा हो जाता है, जिससे पैरों में रक्त संचार ठीक से नहीं हो पाता। इसके कारण निम्नलिखित समस्याएँ हो सकती हैं:

  • चलने पर दर्द: पीड़ित व्यक्ति को थोड़ा सा चलने पर भी पैरों में तेज़ दर्द होता है (क्लॉडिकेशन)।
  • पैर सुन्न: कई लोगों के पैर सुन्न रहते हैं; यहाँ तक कि चुटकी काटने पर भी कम महसूस होता है।
  • मांसपेशियों की कमज़ोरी: पैरों की मांसपेशियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिससे वे धीरे-धीरे अपनी क्षमता खोने लगती हैं।

कोलेस्ट्रॉल के 7 अन्य लक्षण, जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें:

विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या अक्सर बिना किसी लक्षण के भी शरीर में बढ़ती रहती है। इसलिए निम्नलिखित लक्षणों पर ध्यान देना ज़रूरी है:

  1. नाख़ूनों का टूटना या नाख़ूनों के अंदर धब्बे पड़ना।
  2. पैरों की त्वचा का बेवजह चमकना।
  3. पैर में अचानक अल्सर (घाव) का दिखाई देना।
  4. त्वचा के रंग में बदलाव आना।
  5. इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (स्तंभन दोष)।
  6. शरीर में कोलेस्ट्रॉल ज़्यादा होने पर बाल झड़ना।
  7. पैरों की मांसपेशियों की ताक़त कम होना।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?

यदि आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज़्यादा है, तो दवा के साथ-साथ इन नियमों का पालन करें:

  • धूम्रपान छोड़ें: तुरंत सिगरेट पीना बंद कर दें।
  • नियमित व्यायाम: रोज़ाना एक्सरसाइज़ करें।
  • शराब से दूरी: शराब के सेवन से दूर रहें।
  • खान-पान में बदलाव: बाहर के तैलीय, मसालेदार और मिर्च वाले भोजन से परहेज़ करें और स्वस्थ आहार लें।

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