Dental Health: सिर्फ़ 2 बार ब्रश करना काफ़ी नहीं! इन 3 गंभीर बीमारियों से बचने के लिए डेंटिस्ट ने बताई ये ज़रूरी बात

हममें से कई लोग मानते हैं कि दिन में दो बार ब्रश करना ही अच्छी दाँतों की सेहत के लिए काफ़ी है। निःसंदेह, यह प्राथमिक शर्त है। लेकिन सच्चाई यह है कि इसके बाद भी दाँतों में कई रोग घर कर सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्रश करने से दाँत बाहरी रूप से तो साफ़ होते हैं, लेकिन अंदर के कई हिस्सों में रोगाणु और गंदगी जमा रहती है, जिसे केवल एक विशेषज्ञ ही पहचान सकता है। दाँतों की पूर्ण सुरक्षा के लिए नियमित रूप से दंत चिकित्सक के पास जाना अनिवार्य है।

समय पर सावधानी बरतने पर दाँतों की तीन प्रमुख समस्याओं को रोका जा सकता है:

1. मसूड़ों की समस्या (जिंजिवाइटिस और पीरियोडोंटाइटिस):

खाना खाने के बाद दाँतों पर जो हल्की परत जमती है, उसे ‘डेंटल प्लाक’ कहते हैं। यह प्लाक जमकर ‘डेंटल कैलकुलस’ बन जाता है।

  • जिंजिवाइटिस: जब यह समस्या मसूड़ों तक फैलती है।
  • पीरियोडोंटाइटिस: जब यह मसूड़ों की गहराई तक पहुँच जाती है।

यह एसिड दाँतों को जबड़े से जोड़े रखने वाली हड्डियों को धीरे-धीरे नष्ट करने लगता है। शुरुआत में पता नहीं चलता, लेकिन जब दाँत हिलने लगते हैं और मसूड़ों से ख़ून आता है, तब मरीज़ डॉक्टर के पास जाते हैं। नियमित चेकअप से इस समस्या को शुरुआती चरण में ही स्केलिंग या दाँत की सफ़ाई के ज़रिए हल किया जा सकता है।

2. दाँतों में गड्ढा (कैविटी):

दाँतों में गड्ढा होने पर कई लोग इसे शुरुआत में महत्व नहीं देते। जब असहनीय दर्द शुरू होता है, तभी वे डॉक्टर के पास आते हैं।

  • शुरुआती चरण: शुरुआत में आने पर फिलिंग के माध्यम से दाँत को बचाया जा सकता है।
  • देरी होने पर: गड्ढा दाँत की नस (Nerve) तक पहुँच जाने पर रूट कैनाल या क्राउन की आवश्यकता पड़ती है।
  • गंभीर देरी: संक्रमण फैलने पर दाँत निकालना भी पड़ सकता है।

3. मुख कैंसर (Oral Cancer):

मुँह के अंदर कोई छोटा सा घाव अगर धीरे-धीरे बढ़ता है, तो यह ख़तरे का कारण बन सकता है। तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वालों में गाल की चमड़ी मोटी और सख़्त होना, मुँह खोलने में दिक्कत या खाना खाने पर जलन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

  • ख़तरे की वजह: टूटे हुए दाँत का नुकीला हिस्सा मुँह में चुभकर ज़ख़्म बना सकता है, जो बाद में कैंसर का रूप ले सकता है।
  • जागरूकता: शुरुआती अवस्था में डॉक्टर के पास आना ज़रूरी है, अन्यथा कैंसर की रोकथाम मुश्किल हो जाती है।

नियमित दाँत की जाँच कराने से इन समस्याओं को रोकने के साथ-साथ बुढ़ापे में दाँत गिरने और दाँत के दर्द से भी छुटकारा मिलता है।

कितने अंतराल पर डॉक्टर के पास जाएँ?

  • दाँतों में कोई समस्या होने पर: हर छह महीने में एक बार।
  • कोई समस्या न होने पर भी: साल में एक बार दंत चिकित्सक के पास अवश्य जाना चाहिए।

नियमित चेकअप से ही आपके दाँतों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा।

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