छोटी उम्र के लड़कों से शादी कर ‘बंधुआ मजदूर’ क्यों बनाती हैं बोन्डा महिलाएं? जानिए अजीबोगरीब रिवाज

छोटी उम्र के लड़कों से शादी कर ‘बंधुआ मजदूर’ क्यों बनाती हैं बोन्डा महिलाएं? जानिए अजीबोगरीब रिवाज

ओडिशा के दूरदराज इलाकों में रहने वाली बोन्डा जनजाति अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए जानी जाती है। इस समुदाय में एक अनोखी विवाह परंपरा है, जहाँ महिलाएं आमतौर पर अपने से पांच से दस साल छोटे पुरुषों से शादी करती हैं। इस रिवाज का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब महिलाएं बूढ़ी हों, तो उनके पति उनके लिए श्रमिक के रूप में काम कर सकें। बोन्डा समाज मातृसत्तात्मक है, जहाँ महिलाएं सामाजिक निर्णय लेने और परिवार का नेतृत्व करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस जनजाति की आजीविका मुख्य रूप से झूम खेती, पशुपालन और मौसमी वनोपज पर निर्भर करती है। बोन्डा लोग ‘रेमो’ नामक एक ऑस्ट्रो-एशियाई बोली बोलते हैं, जो उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक अभिन्न अंग है। उनके पारंपरिक वस्त्रों और आभूषणों का भी विशेष महत्व है; महिलाएं पीतल और एल्युमीनियम के भारी हार और बेल्ट पहनती हैं, जो उनके धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वासों का प्रतीक है। समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए ‘नायक’ (गाँव का मुखिया) सहित पारंपरिक अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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