दूल्हा बारात में घोड़े पर नहीं, आखिर घोड़ी पर ही क्यों सवार होता है? जानें सदियों पुरानी इस रस्म का बड़ा रहस्य

दूल्हा बारात में घोड़े पर नहीं, आखिर घोड़ी पर ही क्यों सवार होता है? जानें सदियों पुरानी इस रस्म का बड़ा रहस्य

भारत में विवाह उत्सवों में ‘घुड़चढ़ी’ की रस्म सबसे आम और सदियों पुरानी परंपराओं में से एक है। आज के आधुनिक दौर में दूल्हे भले ही कई अलग तरीकों से शादी में एंट्री करें, लेकिन घोड़ी पर चढ़कर बारात लाने का रिवाज अपना विशेष महत्व रखता है। यह एक ऐसी परंपरा है जिसे दूल्हे के लिए एक तरह का ‘टेस्ट’ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूल्हा हमेशा घोड़े की जगह घोड़ी पर ही क्यों सवार होता है? इसके पीछे एक गहरा सामाजिक और प्रतीकात्मक कारण छिपा है।

दरअसल, घोड़े की तुलना में घोड़ी स्वभाव से अधिक चंचल होती है, और इसीलिए उसे नियंत्रित करना ज्यादा कठिन माना जाता है। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि दूल्हा अब एक लापरवाह और बेफिक्र जीवन छोड़कर विवाहित जीवन की तमाम जिम्मेदारियों को संभालने के लिए तैयार है। यदि दूल्हा चंचल घोड़ी को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर पाता है, तो यह माना जाता है कि वह भविष्य में आने वाली हर मुसीबत और अपनी नई जिम्मेदारियों को भी उतनी ही कुशलता से निभाएगा। इस प्रकार, यह रस्म सिर्फ एक सवारी नहीं, बल्कि इंद्रियों पर नियंत्रण और एक जिम्मेदार पति बनने की योग्यता साबित करने का प्रतीक है।

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