शारीरिक कमी नहीं रोक सकती असली ताकत, 8 हज़ार से 27 हज़ार महिलाओं को पेंशन दिलवाने वाली समाजसेविका की अद्भुत कहानी
उत्तर प्रदेश के एटा जिले के मोहल्ला पोस्तीखाना की निवासी हिना नाज़ ने कठिनाइयों के आगे घुटने नहीं टेके। एक पैर से पोलियोग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को हौसले से जीता। आज वह कासगंज जिला प्रोबेशन कार्यालय में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘मिशन शक्ति’ अभियान का जीता-जागता चेहरा बन गई हैं।
संकल्प की यात्रा: रोज़ाना 150 KM का सफर
हिना नाज़ प्रतिदिन लगभग 150 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके कासगंज कार्यालय पहुंचती हैं। न भीषण गर्मी और न ही ठंड उनके दृढ़ संकल्प को तोड़ पाती है। उनका एकमात्र लक्ष्य है—किसी भी पात्र महिला को सरकारी योजनाओं से वंचित न रहने देना। इसी समर्पण के कारण वह आज वहां आने वाली हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद और सहारा बन चुकी हैं।
आत्मनिर्भरता की ‘शक्ति’: 8,000 से 26,928 तक लाभार्थी
हिना नाज़ योजनाओं को लागू करने में गहरी रुचि लेती हैं। वह दस्तावेजों के सत्यापन से लेकर कंप्यूटर फीडिंग और पेंशन वितरण तक की पूरी प्रक्रिया पर स्वयं ध्यान देती हैं। जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब करीब 8,000 महिलाएं ही पेंशन योजना का लाभ ले रही थीं। लेकिन उनकी लगन ने इस संख्या को सितंबर 2025 तक 26,928 तक पहुंचा दिया है। इसके अलावा, वह बच्चों को भी प्रदेश की योजनाओं से लाभ दिलाकर मुख्यधारा से जोड़ रही हैं।
हिना मानती हैं कि शारीरिक कमियां इंसान की असली ताकत को नहीं रोक सकतीं। उनके शब्दों में, “खुश रहने के लिए किसी सहारे की जरूरत नहीं होती, बस खुद पर विश्वास होना चाहिए।” उनका यह विश्वास आज हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रहा है। हिना नाज़ ने यह साबित किया है कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के बदलते आत्मविश्वास का प्रतीक है।