प्रतीक उर रहमान के बाद अब दीप्सिता धर? सदस्यता रिन्यू न कराने पर CPM की फायरब्रांड नेता को लेकर सस्पेंस

पश्चिम बंगाल में वामपंथी राजनीति की युवा पीढ़ी के बीच बढ़ता असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। डायमंड हार्बर से उम्मीदवार रहे प्रतीक उर रहमान को लेकर जारी अटकलों के बीच अब सीपीआईएम की तेजतर्रार युवा नेता दीप्सिता धर को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। खबर है कि फरवरी का दूसरा पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी दीप्सिता ने अभी तक अपनी पार्टी सदस्यता का नवीनीकरण (रिन्यूअल) नहीं कराया है। इस खबर ने अलीमुद्दीन स्ट्रीट की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

पार्टी के नियमों के अनुसार, सदस्यता रिन्यूअल की प्रक्रिया १ जनवरी से ३१ मार्च तक चलती है, लेकिन महत्वपूर्ण नेताओं की प्रक्रिया आमतौर पर फरवरी की शुरुआत तक पूरी कर ली जाती है। दीप्सिता, जिनकी सदस्यता दिल्ली केंद्र में है, उनका अभी तक चुप रहना कई सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि हुगली की उत्तरपाड़ा सीट से उनकी जगह मीनाक्षी मुखर्जी का नाम आगे आने से वह आहत हो सकती हैं। २०१४ के श्रीरामपुर लोकसभा चुनाव में २.३९ लाख वोट पाने वाली दीप्सिता को इस बार मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था।

अपने बचाव में दीप्सिता धर ने कहा, “मेरी सदस्यता दिल्ली में है और संविधान के मुताबिक मेरे पास ३१ मार्च तक का समय है। यह पार्टी का अंदरूनी मामला है और समझ से बाहर है कि यह मीडिया में कैसे आया।” हालांकि, पार्टी सूत्रों की मानें तो वह प्रतीक उर रहमान प्रकरण पर करीब से नजर रख रही हैं और हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण टीवी डिबेट्स से भी उन्होंने दूरी बना ली है। क्या यह महज तकनीकी देरी है या फिर दीप्सिता भी किसी बड़े सियासी बदलाव की ओर बढ़ रही हैं, यह ३१ मार्च तक साफ हो जाएगा।

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