कोलकाता में प्रदूषण का कहर! हर दूसरा बच्चा सांस की बीमारी का शिकार; अब यूनिसेफ और नगर निगम ने मिलाया हाथ

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण ने कोलकाता के बच्चों के बचपन को खतरे में डाल दिया है। कोलकाता नगर निगम (KMC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, शहर का हर दूसरा बच्चा सांस लेने में तकलीफ (Respiratory issues) से जूझ रहा है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए अब नगर निगम ने यूनिसेफ (UNICEF) के साथ मिलकर ‘कोलकाता क्लाइमेट एक्शन प्लान’ (K-CAP) शुरू करने का फैसला किया है।
क्या है K-CAP का उद्देश्य? निगम की मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी रणिता सेनगुप्ता ने बताया कि पिछले सात दशकों में शहर के औसत तापमान में लगातार वृद्धि हुई है। तापमान बढ़ने के कारण डेंगू और मलेरिया जैसे मच्छरों से होने वाले रोगों का व्यवहार भी बदल गया है। अब निगम को साल के 12 महीने इन बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार रहना पड़ता है। यूनिसेफ के बंगाल प्रमुख मंजूर हुसैन ने कहा कि इस योजना के तहत बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। वायु प्रदूषण प्रबंधन और ‘हीट मैनेजमेंट’ इस परियोजना के प्रमुख स्तंभ होंगे।