एलपीजी संकट के बीच पाइपलाइन गैस पर जोर! जानें कैसे बनती है यह गैस और भारत में कितना है स्टॉक?

मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने भारत की रसोई का बजट बिगाड़ने का संकेत दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत की 60% ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस संकट से निपटने के लिए भारत अब रूस और खाड़ी देशों के बजाय अर्जेंटीना, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से एलएनजी (LNG) आयात कर रहा है।

स्वदेशी उत्पादन और तकनीक: भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा गैस खुद पैदा करता है। कृष्णा-गोदावरी बेसिन और पूर्वोत्तर राज्यों (असम, त्रिपुरा) से देश की बड़ी मांग पूरी होती है। आयातित गैस को -162 डिग्री सेल्सियस पर ठंडा करके तरल बनाया जाता है ताकि इसे जहाजों में आसानी से लाया जा सके। बंदरगाह पर पहुंचने के बाद इसे फिर से गर्म कर पाइपों (PNG) के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि देश में 30 दिनों का बफर स्टॉक सुरक्षित है, लेकिन अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो गैस की कीमतों में 20-30% की बढ़ोतरी हो सकती है।

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