जनगणना 2027: लिव-इन में रहने वालों को मिलेगी ‘मैरिड’ की पहचान, जानें क्या है नया नियम

बदलते भारत की सामाजिक तस्वीर अब सरकारी आंकड़ों में भी नजर आएगी। केंद्र सरकार ने 2027 की जनगणना के लिए एक क्रांतिकारी दिशा-निर्देश जारी किया है, जिसके तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को अब ‘शादीशुदा’ (Married) माना जा सकता है। सरकार के इस फैसले ने देश के युवाओं और आधुनिक समाज में एक नई बहस छेड़ दी है। गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यदि कोई लिव-इन कपल खुद को एक ‘स्थिर रिश्ते’ (Stable Relationship) में मानता है, तो जनगणना के दौरान उन्हें विवाहित जोड़ों की श्रेणी में रखा जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि जनगणना का उद्देश्य वास्तविक जनसांख्यिकीय स्थिति को समझना है। यदि कोई जोड़ा पति-पत्नी की तरह साथ रह रहा है, तो उन्हें उसी रूप में दर्ज करना डेटा की सटीकता के लिए जरूरी है। जनगणना के ‘हाउस लिस्टिंग’ चरण के दौरान परिवारों में विवाहित जोड़ों की संख्या पूछी जाती है। इस बार, यदि कोई अविवाहित जोड़ा खुद को विवाहित घोषित करता है, तो प्रगणक (Enumerators) उसे चुनौती देने के बजाय उनके स्व-घोषणा के आधार पर ही डेटा दर्ज करेंगे। यह कदम उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो लंबे समय से साथ रहकर भी सामाजिक या आधिकारिक पहचान के लिए जूझ रहे थे।
2027 की यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2027 के बीच पहले चरण का काम पूरा किया जाएगा, जिसमें घरों और बुनियादी ढांचे का विवरण लिया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या की सघन गणना होगी। सरकार ने इसके लिए एक विशेष मोबाइल ऐप तैयार किया है, जिसे 30 लाख से अधिक कर्मचारी उपयोग करेंगे। खास बात यह है कि आजादी के बाद पहली बार इसमें जाति आधारित जनगणना को भी शामिल किया गया है। लिव-इन कपल्स को वैवाहिक दर्जा देने का यह निर्णय केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पसंद और बदलती जीवनशैली के प्रति सरकार के बढ़ते सम्मान का प्रतीक है।