होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच दिल्ली में भारत-रूस की महाबैठक! ट्रंप की धमकियों का नहीं हुआ असर

एक तरफ जहाँ ब्रिटेन और कई पश्चिमी देश होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान की गतिविधियों और अपने फंसे हुए जहाजों को लेकर परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत और रूस अपने संबंधों को एक नई दिशा देने जा रहे हैं। रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मानतुलव गुरुवार सुबह दिल्ली पहुंचे हैं। इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारत और रूस के बीच होने वाला वह बड़ा समझौता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

मानतुलव का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है। वे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ रक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे रणनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, रूसी दूत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात करेंगे। यह बैठकें ऐसे समय में हो रही हैं जब अमेरिका और पश्चिमी देश भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव डाल रहे हैं। खासकर ट्रंप प्रशासन ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की थी, लेकिन भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है।

इस महत्वपूर्ण दौरे से पहले, 30 मार्च को भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूसी उप-विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की थी। पिछले साल के शिखर सम्मेलन में लिए गए आर्थिक फैसलों को लागू करना इस बैठक का मुख्य एजेंडा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और भारत का यह तालमेल पश्चिमी देशों के लिए एक कड़ा संदेश है कि भारत अपनी विदेश नीति के लिए किसी बाहरी दबाव में नहीं आने वाला है। ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा तकनीक में यह साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की तस्वीर बदल सकती है।

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