मोथाबाड़ी हिंसा की जांच अब NIA के हाथ! सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को लगाई कड़ी फटकार

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) पर हुए बर्बर हमले की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम आज मालदा पहुंच रही है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद इस मामले में एनआईए को ६ अप्रैल तक अपनी प्राथमिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। बुधवार को हुई इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसकी गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है।
वोटर लिस्ट से नाम कटने की अफवाह और विरोध के नाम पर मोथाबाड़ी में जो तांडव मचा, उसने लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ ऑफिस को घेरकर ८ न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था। जब उन्हें निकाला जा रहा था, तब उनकी गाड़ियों पर लाठी-डंडों से हमला किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “पश्चिम बंगाल में कानून का शासन खत्म हो चुका है।” शीर्ष अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), मालदा के जिलाधिकारी और एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इस मामले में चुनाव आयोग ने पहले सीबीआई जांच की बात कही थी, लेकिन बाद में राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने इसकी जिम्मेदारी एनआईए को सौंप दी। जस्टिस जयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
पुलिस ने अब तक इस मामले में आईएसएफ (ISF) उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली सहित १८ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें १० दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। सीसीटीवी फुटेज के जरिए अन्य दंगाइयों की पहचान की जा रही है। मोथाबाड़ी में अभी भी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और भारी सुरक्षा बल तैनात है। ६ अप्रैल को होने वाली वर्चुअल सुनवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।