चुनाव आयोग का सख्त एक्शन! CEO दफ्तर में हंगामे के बाद कड़े नियम लागू, सस्पेंशन की चेतावनी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ की आहट के साथ ही राज्य में हिंसा और विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के बाहर हुए हिंसक प्रदर्शन और मालदा में जजों को बंधक बनाने जैसी घटनाओं ने चुनाव आयोग को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद आयोग ने पूरे राज्य में बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस या जमावड़े पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

हालिया घटनाक्रम पर नजर डालें तो पिछले मंगलवार को फॉर्म ६ के मुद्दे पर बीएलओ (BLO) के विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया था। सीईओ कार्यालय के बाहर तृणमूल समर्थक बीएलओ और भाजपा समर्थकों के बीच तीखी झड़प हुई, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और पुलिस के साथ उनकी हाथापाई भी हुई। अंततः केंद्रीय सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालना पड़ा। इसके साथ ही मालदा में चुनाव ड्यूटी पर तैनात जजों को घंटों रोकने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी या संगठन फिर से इस तरह के हंगामे में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल निलंबन (Suspension) जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी। विशेष रूप से बीएलओ रक्षा कमेटी मंच की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। अब सीईओ कार्यालय में किसी भी प्रतिनिधिमंडल के प्रवेश के लिए पहले से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने वालों को तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया है। चुनाव से ठीक पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोग का यह कड़ा रुख बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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