बंगाल चुनाव से पहले ९१ लाख वोटर ‘गायब’! सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव आयोग का अब तक का सबसे बड़ा एक्शन!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के मद्देनजर भारत निर्वाचन आयोग ने एक ऐतिहासिक रिपोर्ट सार्वजनिक की है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए आयोग ने उन ६० लाख वोटरों की सूची जारी कर दी है, जिनका मामला विचाराधीन था। इस सूची के आने के बाद यह साफ हो गया है कि बंगाल में मतदाताओं की एक बहुत बड़ी संख्या इस बार मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाएगी। आयोग ने ‘पात्र’ (Eligible) और ‘हटाए गए’ (Deleted) नामों का पूरा विवरण पेश किया है।

किसे मिली हरी झंडी और कौन हुआ बाहर? कल आधी रात को जारी आंकड़ों के अनुसार, ३२,६৮,১২৯ मतदाताओं को ‘पात्र’ पाया गया है और उन्हें मुख्य सूची में शामिल कर लिया गया है। वहीं, २७,१৬,৩৯৩ लोगों के नाम ‘डिलीट’ कर दिए गए हैं, क्योंकि वे पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं कर पाए। आयोग ने बताया कि अब तक कुल ६०,०৬,৬৭৫ विचाराधीन मामलों में से ५৯,৮৪,৫१২ का निपटारा कर दिया गया है। यानी प्रक्रिया लगभग ९९% पूरी हो चुकी है।

कुल ९१ लाख वोटर्स लिस्ट से बाहर चुनाव आयोग की इस कार्रवाई के बाद आंकड़े डराने वाले हैं। इससे पहले एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान ५৮ लाख नाम काटे गए थे। इसके बाद २८ फरवरी को ५.४६ लाख और नाम हटाए गए। अब ताज़ा सूची में २७ लाख नाम और जुड़ने के बाद, कुल हटाए गए मतदाताओं की संख्या लगभग ९०,৮৩,৩৪৫ हो गई है। यानी करीब ९१ लाख लोग वोटर लिस्ट से बाहर हो चुके हैं।

राजनीतिक गलियारों में हड़कंप एक साथ ९१ लाख वोटरों का नाम लिस्ट से हटने को लेकर राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। इतनी बड़ी संख्या में वोटरों का बाहर होना चुनाव के नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है। सवाल यह है कि क्या ये लोग वोट डाल पाएंगे? चुनाव आयोग के अनुसार, जिनका नाम ‘डिलीट’ लिस्ट में है, उनका इस साल वोट डालना असंभव लग रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजनीतिक दल इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

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