ईरान की बर्बादी का काउंटडाउन! हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से हर दिन होगा ३,६০০ करोड़ का नुकसान

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी मुश्किल लग रही है। इस्लामाबाद में हुई उच्च स्तरीय वार्ता के विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी की चेतावनी दी है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह नाकेबंदी प्रभावी होती है, तो ईरान को प्रतिदिन लगभग ४३५ मिलियन डॉलर (करीब ३,६०० करोड़ भारतीय रुपये) का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह प्रतिबंध सोमवार से ही प्रभावी माना जा रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल और खाद्य आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के कुल नुकसान का एक बड़ा हिस्सा, लगभग २७६ मिलियन डॉलर, कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात से आता है। ईरान वर्तमान में युद्धकालीन कीमतों पर प्रति दिन १५ लाख बैरल तेल निर्यात करता है। हालांकि, केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, ईरान ने मार्च के अंत तक लगभग १५.४ करोड़ बैरल तेल समुद्र में फ्लोटिंग स्टोरेज के रूप में जमा कर रखा है, जो उसे शुरुआती झटके से बचा सकता है। वहीं ईरान अब वैकल्पिक रास्तों, जैसे ‘जास्क टर्मिनल’, के जरिए अपना व्यापार बचाने की कोशिश में जुटा है।

अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता टूटने के पीछे यूरेनियम को लेकर लगायी गयी ‘कठिन शर्त’ मुख्य वजह बताई जा रही है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अगले २० वर्षों के लिए अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह बंद कर दे और मौजूदा भंडार को देश से बाहर भेजे। इसके विपरीत, ईरान ने केवल ५ साल की मोहलत और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में धीरे-धीरे कटौती का प्रस्ताव दिया। तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन की चिंता और ईरान की अपनी शर्तों पर अड़ने की जिद ने शांति के रास्ते बंद कर दिए हैं। हालांकि कुछ विश्लेषक १२.५ साल के एक गुप्त समझौते की उम्मीद जता रहे हैं, लेकिन फिलहाल हॉर्मुज में तनाव चरम पर है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *