नाती के हाथ में ग्रामीण लड़के का हाथ, जातियों के बीच की दूरियों पर बृजभूषण सिंह का बड़ा बयान!

कैसरगंज से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह सवर्ण और पिछड़ों के बीच आपसी सौहार्द और सामाजिक ताने-बाने पर खुलकर बात करते नजर आ रहे हैं। इस वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बृजभूषण का छोटा नाती एक ग्रामीण लड़के का हाथ पकड़े हुए उनके सामने से गुजर रहा है। इसी दौरान बृजभूषण उस लड़के से उसकी जाति के बारे में पूछते हैं। जब पास से गुजर रहा वह युवक जवाब देता है कि वह गोसानी (गोस्वामी) है, तो पूर्व सांसद कहते हैं, “बच्चे क्या जानें कि कौन अगड़ा है और कौन पिछड़ा? बड़े होकर तो इनके बीच भेद पैदा हो ही जाएगा।”
बृजभूषण सिंह का यह भी कहना था कि आज के समय में उच्च और निम्न जातियों के बीच आपसी तालमेल और समन्वय बेहतर रूप से दिखाई दे रहा है। इन दोनों बच्चों की भी यह पहली मुलाकात थी, ऐसा नहीं है कि वे रोज एक-दूसरे से मिलते-झुलसते रहते हैं। वीडियो में दोनों मासूम बच्चों को बेहद प्यार से, मुस्कुराते हुए और एक-दूसरे का हाथ थामे हुए आगे बढ़ते देखा जा सकता है। वीडियो के अंत में बृजभूषण अपने नाती से कहते हैं कि वह अपने इस नए दोस्त को कुछ खाने के लिए दे। यह वीडियो लोगों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है और इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
आपको बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह अपने बयानों और राजनीतिक रुख के कारण अक्सर मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं। हाल ही में उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की खुले तौर पर तारीफ करके राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। उन्होंने एक बयान में कहा था कि अखिलेश यादव के बिना ‘इंडिया’ गठबंधन का कोई वजूद या अर्थ नहीं है। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने भी स्वीकार किया था कि बृजभूषण सिंह के साथ उनके संबंध काफी अच्छे रहे हैं। इसके अलावा, कुछ दिन पहले बृजभूषण सिंह का एक और वीडियो सामने आया था जिसमें उनका एक समर्थक उनसे बात करते हुए कहता है कि उसने सपना देखा है कि चुनाव आयोग का सिंबल आ चुका है और बृजभूषण सिंह को समाजवादी पार्टी का ‘साइकिल’ चुनाव चिह्न मिल गया है। इस बात को सुनकर बृजभूषण सिंह सिर्फ मुस्कुराते हुए आगे बढ़ जाते हैं। इन तमाम घटनाओं और बयानों के चलते बृजभूषण सिंह की राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं।