नेपाल के बाद पेरू में Gen Z का हल्ला बोल, अनिवार्य पेंशन स्कीम के विरोध में युवा सड़कों पर, सरकार की घटती लोकप्रियता

नेपाल के बाद अब दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में भी ‘जनरेशन ज़ी’ (Gen Z) के प्रोटेस्ट शुरू हो गए हैं। युवा राष्ट्रपति दीना बोलुआर्टे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राजधानी लीमा में झड़पों के एक हफ्ते बाद शनिवार को बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे। इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक एक दर्जन से ज्यादा पुलिस अधिकारी, प्रदर्शनकारी और पत्रकार घायल हो चुके हैं।

विरोध का कारण: जबरन पेंशन स्कीम

ये प्रदर्शन 20 सितंबर को पेंशन सुधारों की घोषणा के बाद शुरू हुए। नए नियमों के तहत 18 साल से ऊपर के सभी पेरूवासियों के लिए किसी पेंशन कंपनी से जुड़ना अनिवार्य कर दिया गया है। 18 साल का होते ही उन्हें हर महीने पेंशन कंपनियों को एक तय रकम देना होगी। लोगों को लगता है कि यह योजना जबरन वसूली जैसी है।

युवाओं की मुख्य नाराजगी:

  • युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही, ऐसे में वे पेंशन के लिए पैसा कहां से जमा करेंगे?
  • पेंशन प्रदाता संस्थाओं में पहले से ही भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी की शिकायतें हैं।
  • लोग चाहते हैं कि पेंशन योजना इच्छा पर आधारित हो, मजबूरी न बने।
  • युवाओं का कहना है कि सरकार को पहले रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

भ्रष्टाचार और गिरती लोकप्रियता:

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध सिर्फ पेंशन सुधारों तक सीमित नहीं है। लोगों में भ्रष्टाचार, आर्थिक असुरक्षा और सरकारी जवाबदेही की कमी को लेकर भी भारी नाराजगी है। दिसंबर 2022 में दीना बोलुआर्टे के सत्ता संभालने के दौरान भी हिंसक प्रदर्शनों में दर्जनों लोगों की जान गई थी, जिससे जनता का गुस्सा और बढ़ा है।

जुलाई रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति बोलुआर्टे की अनुमोदन रेटिंग सिर्फ 2.5% है, जबकि कांग्रेस की लोकप्रियता महज 3% पर है। लोगों का मानना है कि सरकार उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय दमनकारी रवैया अपना रही है।

खनन उद्योग पर असर:

यह अशांति पेरू के खनन उद्योग को भी प्रभावित कर रही है। हडबे मिनरल्स ने लगातार जारी प्रदर्शनों के कारण अपनी पेरू मिल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। पेरू दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तांबा उत्पादक है और सोने-चांदी का भी प्रमुख निर्यातक है। ऐसे में इन प्रदर्शनों का असर अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ सकता है।

विरोध का प्रतीक ‘लूफी’:

पेरू में लगभग 27% आबादी 18 से 29 वर्ष के बीच है, इसलिए युवाओं की भूमिका अहम है। कई प्रदर्शनकारी जापानी मंगा ‘वन पीस’ के कैरेक्टर ‘लूफी’ से प्रेरित पुआल टोपी वाली खोपड़ी का प्रतीक इस्तेमाल कर रहे हैं, जो भ्रष्ट शासकों के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है। छात्र प्रदर्शनकारी सैंटियागो ज़पाटा ने कहा, “मेरी पीढ़ी अब सामने आ रही है क्योंकि हम चुप कराए जाने से थक चुके हैं। हमें डराने की कोशिश की जाती है, जबकि डर तो उस सरकार को होना चाहिए जिसे हमने चुना है।”

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