क्या आप जानते हैं देश का पहला ‘नेशनल स्कूल’ कहाँ बना? बंगाल के इस जिले का इतिहास सुनकर गर्व होगा

शिक्षा और क्रांति के संगम की जब भी बात होगी, पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले का नाम गर्व से लिया जाएगा। आज जहाँ चारों ओर महंगे प्राइवेट स्कूलों की भीड़ है, वहीं मेदिनीपुर का खजुरी क्षेत्र देश के पहले राष्ट्रीय विद्यालय (National School) की गौरवशाली विरासत को संजोए हुए है। यह वही मिट्टी है जिसने १८०४ के नमक विद्रोह से लेकर नमक सत्याग्रह तक हर आंदोलन में अग्रिम भूमिका निभाई है।

इतिहास के पन्नों से: १९२० में महात्मा गांधी ने बॉम्बे कांग्रेस अधिवेशन में अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली के विकल्प के रूप में ‘राष्ट्रीय विद्यालयों’ के गठन का आह्वान किया था। इस पुकार पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूर्व मेदिनीपुर के कलागेछिया गांव में जमींदार जगदीश चंद्र मैती के सहयोग से १ मार्च, १९२१ को देश के पहले राष्ट्रीय विद्यालय का उद्घाटन किया गया।

मुख्य तथ्य:

  • उद्घाटन: दिग्गज नेता देशप्राण वीरेंद्रनाथ शासमल द्वारा।
  • प्रथम प्रधानाध्यापक: क्रांतिकारी निकुंज बिहारी मैती।
  • पृष्ठभूमि: छात्रों ने ब्रिटिश स्कूलों को छोड़कर स्वदेशी शिक्षा का मार्ग चुना।

इस विद्यालय की नींव १८४५ में ही पड़ गई थी, लेकिन १९২১ में इसे राष्ट्रीय पहचान मिली। यह संस्थान सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम का एक जीवंत दस्तावेज है। संस्थापक जगदीश चंद्र मैती का इस विद्यालय के प्रति इतना गहरा लगाव था कि उनका अंतिम संस्कार भी स्कूल परिसर में ही किया गया था। आज भी खजुरी की हवाओं में उस संघर्ष और देशभक्ति की गूँज सुनाई देती है।

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