ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ED: Z+ सुरक्षा के दुरुपयोग का लगा गंभीर आरोप!

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत एक विशेष याचिका दायर की है। ED का आरोप है कि चुनाव रणनीतिकार संस्था I-PAC के दफ्तर में छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी ‘Z+’ सुरक्षा का उपयोग करके जांच में बाधा डाली। केंद्रीय एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि उस दिन उनके अधिकारी ‘आतंकित’ (Terrorized) महसूस कर रहे थे।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष ED ने दावा किया कि 8 जनवरी को जब कोयला घोटाले के सिलसिले में साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी चल रही थी, तब मुख्यमंत्री वहां पहुंच गईं। ED के अनुसार, मुख्यमंत्री ने न केवल जांच रोकी, बल्कि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी अपने साथ ले गईं। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि कंप्यूटर डेटा का बैकअप लेने से रोका गया और सीसीटीवी फुटेज तक हटा दिए गए।

ED का कहना है कि उनके अधिकारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है और उन्हें डराया-धमका गया है। इस पूरे मामले में ED ने CBI जांच की मांग की है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह आगामी चुनावों से पहले डेटा चुराने की एक साजिश थी। ED का दावा है कि अवैध कोयला खनन से प्राप्त लगभग 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए गोवा भेजे गए और फिर नकद में बदलकर I-PAC के खातों में आए। एजेंसी ने अदालत से अपील की है कि बंगाल में इस तरह की ‘अराजकता’ को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।

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