बर्न-आउट से बचने के लिए रतन टाटा की सलाह: काम को बोझ नहीं, जीवन का उद्देश्य बनाएं

टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का मानना था कि काम और निजी जीवन को अलग-अलग खानों में बांटने के बजाय उन्हें एक साथ जोड़ना (Integrate) चाहिए। उनके अनुसार, जब आपका काम आपके व्यक्तित्व का आईना बन जाता है, तो प्रयास बोझ नहीं बल्कि एक उद्देश्य जैसा लगता है। सोशल मीडिया के इस दौर में जहां काम का दबाव बढ़ रहा है, टाटा की ‘वर्क-लाइफ इंटीग्रेशन’ की सोच अधिक प्रासंगिक हो गई है।

टाटा के विचारों से सीख: * सिर्फ घंटों की गिनती नहीं: काम की संतुष्टि को सिर्फ लॉग-इन के घंटों से नहीं मापा जा सकता।

  • मूल्यों के साथ तालमेल: ऐसा काम चुनें जो आपके सिद्धांतों से मेल खाता हो, न कि सिर्फ वेतन से।
  • तनाव से मुक्ति का रास्ता: जब लोग अपने काम में अर्थ ढूंढ लेते हैं, तो रचनात्मकता और ऊर्जा अपने आप आ जाती है।
  • समग्र सफलता: बिना व्यक्तिगत संतुष्टि के पेशेवर उपलब्धियां अधूरी महसूस होती हैं।

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